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मॉब लिंचिंग पर चिट्ठी के जवाब में सवाल : आदिवासियों को माओवादी निशाना बनाते हैं तब ये लोग चुप क्यों रहते हैं

हाल ही में 49 बड़ी हस्तियों द्वारा देश के प्रधानमंत्री को भीड़ की हिंसा को रोकने को लेकर खत लिखा था. अब ‘चुनिंदा मामलों में ही आलोचना और विरोध’ करने का आरोप लगाते हुए  61 अन्य हस्तियों ने खुला खत लिखा है. और पूछा है कि जब आदिवासियों को माओवादी निशाना बनाते हैं तब ये लोग क्यों चुप रहते हैं.

नई दिल्ली: हाल ही में 49 बड़ी हस्तियों द्वारा देश के प्रधानमंत्री को भीड़ की हिंसा को रोकने को लेकर खत लिखा था. अब ‘चुनिंदा मामलों में ही आलोचना और विरोध’ करने का आरोप लगाते हुए  61 अन्य हस्तियों ने खुला खत लिखा है.  खत का शीर्षक है- ‘Against Selective Outrage and False Narratives’. इस खत को लिखने वाली हस्तियों में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत, गीतकार प्रसून जोशी, क्लासिकल डांसर और सांसद सोनल मानसिंह, वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट, फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर और विवेक अग्निहोत्री शामिल हैं.

इस खत में पूछा गया है कि जब आदिवासियों को माओवादी निशाना बनाते हैं तब ये लोग क्यों चुप रहते हैं. इस लेटर में आगे लिखा गया है कि कश्मीर में जब अलगाववादियों ने स्कूल बंद करा दिए, तब आखिर ये लोग कहां थे. इसके साथ ही जेएनयू में नारेबाजी प्रकरण को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा गया है कि आखिर इन लोगों ने देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारों पर अपनी बात क्यों नहीं रखी थी.

बता दें कि इससे पहले भारत में साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता पर काबिज़ होने के बाद से अल्पसंख्यक और दलित समुदायों के खिलाफ बढ़ी मॉब लिंचिंग की घटनाओं के मद्देनज़र देश की कई नामचीन हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. इस पत्र को कला, फिल्म, शिक्षा और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कई क्षेत्रों के 49 लोगों ने मिलकर पीएम मोदी को भेजा था. पत्र लिखने वालों में फिल्ममेकर मणि रत्नम, अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, गायक शुभा मुदगल और इफ्तेखार एहसान जैसे लोग शामिल थे.

 

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