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अक्षय तृतीया : जिस दिन रहते थे बाजार गुलजार बजती थीं शहनाइयां आज पसरा है सन्नाटा

समय से ज्यादा बलवान कोई नहीं प्रतिवर्ष जिस तिथि को न केवल देश के बाजार ग्राहकों से गुलजार रहते बल्कि जिधर देखो उधर विवाह समारोहों की भरमार दिखाई देती थी, इसबार कोरोना महामारी ने समयचक्र को ऐसा अफसोसजनक बना दिया है की 25  अप्रैल से शुरू होने वाले अक्षय तृतिया मुहूर्त पर न बाजार गुलजार हैं न कहीं शहनाई की धुन सुनाई दे रही है। चारों ओर लोग घरों में कैद है व चौतरफा कोरोना महामारी से पसरा सन्नाटा है। हालांकि अक्षय तृतीया पर इस बार बहुत शुभ योग बन रहे हैं। इस साल 25 अप्रैल दोपहर करीब बारह बजे से  तृतीया तिथि आरंभ होगी जो अगले दिन दोपहर करीब 1.20 मिनट तक रहेगी। इस बार अक्षय तृतीया पर  उदय व्यापिनी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है, जो इसे बहुत ही फलदायी बना रहे हैं। इस बहुत अच्छा मुहूर्त है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन शंख से की गई पूजा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होते हैं। भगवान परशुराम जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है। कहते हैं कि इस दिन दान करने सेअक्षय फल मिलता है। अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी नाश न हो। इस दिन अबूझ मुहूर्त भी होता है। कहते हैं कि इस दिन बिना मुहूर्त के बहुत से अच्छे कार्य किए जाते हैं। विवाह समारोह के लिए यह दिन अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है। लेकिन फिलहाल देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लॉकडाउन है ऐसे में घर  में रहकर ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करें। इसके लिए आपको सुबह स्नान करके भगवान विष्णु को कच्चे दूध से स्नान कराएं। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पर दक्षिणावर्ती शंख में जलभरकर अर्पित करें। इसके अलावा बचे जल को घर में छिड़कें। माता लक्ष्मी को पंच मेवे का भोग लगाएं और विष्णु भगवान को खीर का भोग लगा सकते हैं।

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