भाजपा में आने के बाद खुद के केंद्रीय मंत्री बनने की बाट जोह रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की प्रदेश कार्यकारिणी में भी निराशा ही हाथ लगी है। उनके किसी भी समर्थक को प्रदेश कार्यकारिणी में पदाधिकारी नहीं बनाए जाने के बाद अब चर्चाओं का बाजार सरगर्म हो गया है। पूर्व में भी जब प्रदेश अध्यक्ष ने अपने महामंत्रियों की घोषणा की थी उस समय भी सिंधिया समर्थक दरकिनार कर दिए गए थे। इसके बाद यह माना जा रहा था की कांग्रेस की तर्ज पर भाजपा में भी श्री सिंधिया अपने समर्थकों को भाजपा कार्यकारिणी में शामिल कराने में कामयाब होंगे। लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत भाजपा संगठन ने उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं दी है। हालांकि सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर अंचल से इस कार्यकारिणी में भिंड का बजन बढ़ा है प्रदेश के दो उपाध्यक्ष सांसद श्रीमती संध्या राय और मेंहगाव से भाजपा विधायक रह चुके मुकेश चौधरी बनाये गए है । ग्वालियर से मदन कुशवाह को प्रदेश मंत्री बनाया गया है । वे बसपा से एमएलए रहे और कांग्रेस से होते हुए भाजपा में पहुंचे है । लोकेंद्र पाराशर को एक बार फिर प्रदेश के मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है । जहां तक पार्टी से जुड़े मोर्चों की बात है तो वहां भी सिंधिया को अलग थलग ही रखा गया है। आज घोषित 7 मोर्चा अध्यक्ष में भी पूरी तरह भाजपा के मूल नेताओ को ही पार्टी ने कमान सौंपकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।
भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी में सिंधिया को करारा झटका समर्थकों को नहीं मिला स्थान
उल्लेखनीय है की हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जो मंत्रीमंडल विस्तार किया था उसमें केवल दो नेताओं को जगह मिली थी यह दोनो ही सिंधिया के कट्टर समर्थक थे। इसके बाद यह चर्चा जोर पकड़ गई थी की मध्यप्रदेश में श्री सिंधिया और शिवराज के बीच बढ़ती नजदीकियों का असर अब सत्ता पर भी दिखाई देने लगा है। इसी के मद्देनजर यह माना जा रहा था की जिस प्रकार श्री सिंधिया ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके सत्ता में अपने समर्थक विधायकों को मंत्री पद दिलवाया है उसी प्रकार संगठन में भी वे अपने समर्थकों को शामिल कराने में कामयाब हो जाएंगे। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में भी यह चर्चा थी की कार्यकारणी घोषित होने में हो रहे विलम्ब के पीछे भी सिंधिया ही जिम्मेदार हैं और वह अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिलवाने के लिए उच्च पार्टी नेतृत्व पर दबाव डाल रहे हैं। लेकिन आज जो कार्यकारणी सामने आई है उसे देखकर ऐसा लगता है की प्रदेश व शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं की भावना को समझते हुए सिंधिया समर्थकों को प्रदेश कार्यकारिणी में तवज्जो नहीं दी है।
RELATED ARTICLES


