Homeदेशकश्मीर में सेना ने आतंकियों को मार गिराने का बनाया डबल शतक

कश्मीर में सेना ने आतंकियों को मार गिराने का बनाया डबल शतक

कश्मीर घाटी में आतंकियों के सफाए के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन ऑल आउट में मारे गए आतंकियों की संख्या गुरुवार को डबल सेंचुरी के आंकड़े को पार कर गई। बीते सात साल में यह पहला मौका है, जब किसी एक साल के पहले 11 माह के दौरान जम्मू कश्मीर में मारे गए आतंकियों की संख्या 200 के पार पहुंची हो। वर्ष 2010 में 232 आतंकी मारे गए थे।

ऑपरेशन ऑल आउट का असर सिर्फ आतंकी संगठनों के भीतर ही नहीं, कश्मीर के गली-मोहल्लों में सक्रिय उनके समर्थकों और ओवरग्राउड नेटवर्क पर भी नजर आ रहा है। मुठभेड़ के समय आतंकियों को बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने वाली हिंसक भीड़ भी गत जुलाई के बाद लगातार कम होती जा रही है। अधिकांश ओवरग्राउंड वर्कर भूमिगत हो चु़के हैं और कई खुद ही पुलिस के समक्ष सरेंडर करने पहुंच रहे हैं, जबकि 40 से ज्यादा ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े जा चुके हैं।

 

कई स्थानीय युवक जिन्होंने बीते एक साल के दौरान बंदूक उठाई थी, जहां जान बचाने के लिए अब अपने परिजनों के माध्यम से सुरक्षाबलों के समक्ष सरेंडर का अवसर तलाश रहे हैं, तो आतंकी संगठनों के लिए कैडर का मनोबल बनाए रखने के लिए कोई मजबूत कमांडर नहीं मिल रहा है। उन्हें अपने परिवार के सदस्यों को गुलाम कश्मीर से घाटी में भेजना पड़ रहा है।वर्ष 2016 में कश्मीर में आतंकी बुरहान की मौत के बाद पैदा हुए विधि व्यवस्था के संकट के दौरान जिस तरह से स्थानीय और विदेशी आतंकियों ने अपना नेटवर्क मजबूत बनाते हुए नयी भर्ती शुरू की थी, उसे देखते हुए सेना, राज्य पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को केंद्र ने राज्य सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद आतंकियों की नकेल कसने का निर्देश दिया था।
ऑपरेशन ऑल आउट में सक्रिय भूमिका निभा रही सेना को लगभग एक दशक बाद वादी में आतंकरोधी अभियानों के संचालन की खुली छूट मिली है। वर्ष 2000 के बाद कश्मीर के शहरी और घनी आबादी वाले इलाकों में सेना द्वारा आतंकरोधी अभियान चलाना बंद कर दिया गया था। ग्रामीण इलाकों में भी अगर उसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होती थी तो उसे स्थानीय पुलिस और प्रशासन से पहले संपर्क करना पड़ रहा था।

कई जगह से सेना के शीविर भी हटा लिए गए थे। लेकिन ऑपरेशन ऑल आउट की रणनीति तैयार होने के साथ ही वादी में आतंकियों के किले बन चुके विभिन्न इलाकों में एक बार फिर से सेना की राष्ट्रीय राइफल्स के कैंप स्थापित किए गए। इसके अलावा श्रीनगर व कुछ अन्य मुख्य शहरों को छोड़ अन्य कस्बों और ग्रामीण इलाकों में सेना को आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाने की पूरी छूट मिली और इसमें पुलिस व सीआरपीएफ को भी उसके साथ शामिल किया गया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments