HomeBreakingमंत्रीजी की पदयात्रा और बढ़ती महंगाई पर बिफरती जनता

मंत्रीजी की पदयात्रा और बढ़ती महंगाई पर बिफरती जनता

एक तरफ पेट्रोल डीजल खाना पकाने की गैस व अन्य खाद्य सामग्रियों के बढ़ते दाम और दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री की पदयात्रा डिप्लोमेसी अब जनता को तनिक भी सुहाती नहीं दिख रही है। आज ही की बात करें तो जिस इलाके में मंत्री महोदय कदमताल कर रहे थे उन्ही इलाकों की जनता चर्चा कर रही थी महंगाई दूर करने के लिए ये क्या कर रहे हैं?कोई पेट्रोल पर तो कोई गैस पर तो कोई खाने का बजट बिगड़ने पर उलाहना देता दिखाई दे रहा था। सबसे बड़ी बात यह भी सामने आई की जिस महकमें की जिम्मेदारी मंत्री महोदय पर है उस बिजली के बढ़े दामों पर भी लोग कटाक्ष करते दिखे। हालांकि व्यक्तिगत सम्बन्धों सम्पर्कों का लाभ मंत्री को खूब मिला जिस कारण पदयात्रा को सराहना भी मिली और आमने सामने किसी ने मुंह नहीं खोला।
उल्लेखनीय है की विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आम जनों से चर्चा करने के लिए प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर  अपने गृहनगर के पाताली हनुमान मंदिर क्षेत्र में आज सुबह से पदयात्रा कर रहे हैं। चूंकि यह इलाका उनके अपने ही विधानसभा क्षेत्र का ही है अतः मंत्री महोदय की पदयात्रा के प्रति जनता में उत्साह दिखाई दिया। लेकिन इस उत्साह के बीच बढ़ती महंगाई की परेशानी साफ दिखी मंत्री चर्चा करके आगे बढे तो पीछे जनता महंगाई पर बिफरती दिखाई दी। सर्वाधिक चर्चा सैकड़ा का अंक पार करते पेट्रोल की थी। कुछ लोग खाने के तेल गैस व अन्य खाद्य सामग्री के भाव को लेकर चर्चा करते दिखे। अधिकांश लोगों का कहना था की जनता से केवल वादे करके नेता चले जाते हैं महंगाई बेरोजगारी कोई दूर नहीं करता । चूंकि मंत्री प्रधुम्न सिंह बिजली विभाग के मंत्री हैं तो तमाम लोग चुनाव के बाद बिजली के दाम बढ़ाए जाने की घोषणा और आगे भी दाम बढ़ने की बात पर नाराज थे। 
अगर आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो पिछले 13 साल में प्रदेश में बिजली की दरें दोगुना हो गई हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2007-08 में बिजली दर 3.29 रुपए प्रति यूनिट थी जो 2020 में बढ़कर 6.55 रुपए प्रति यूनिट हो गई है। पिछले साल बिजली कंपनियों ने दो हजार करोड़ का घाटा बताते हुए 5.73 फीसदी तक बिजली महंगी किए जाने का प्रस्ताव आयोग को सौंपा था।
इसके बाद आयोग ने सुनवाई कर नया टैरिफ लागू कर दिया था। जिसमें प्रदेश में बिजली का टैरिफ करीब करीब 2 फीसदी (1.98 फीसदी) बढ़ गया था। हर साल बिजली की दरों में होने वाली यह टैरिफ बढ़ोत्तरी करने के पीछे बिजली कंपनियों का बड़े घाटा से जूझना बताया जाता है
बिजली कंपनियों के घाटे का कारण- मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियां लगातार घाटे में चल रही है जबकि बिजली के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। इसके बाद भी बिजली कंपनियां लगातार घाटे में चल रही है इसक सबसे बड़ा कारण बड़े पैमाने पर बिजली चोरी होना और बिजली के बड़े बकायादारों जो रसूखदारों की श्रेणी में आते है उनसे बकाया बिजली का बिल नहीं वसूला जाना है। पिछले दिनों ऊर्जा विभाग की बैठक में बकायादारों से बिजली का बिल नहीं वसूले जाने का मुद्दा उठा था जिसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़े बकायादारों से सख्ती से बिजली बिल वसूल करने के निर्देश दिए थे।
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