ग्वालियर /मातृभाषा का सीधा संबंध माँ से होता है, वैज्ञानिक शोध से भी प्रमाणित हो चुका है कि जो बालक मातृभाषा में अध्ययन करता है, कुछ भी सीखने की प्रक्रिया में मातृभाषा को प्राथमिकता देता है, उस बालक का मस्तिष्क अधिक विकसित होता है। तकनीकी रूप से उन्नत जापान, जर्मनी, रूस, कोरिया व चीन के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध किया है अतः हम भारतीयों को भी अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रति अधिक जागरूक होना होगा। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लश्कर जिला संघचालक प्रहलाद सबनानी ने भारतीय सिन्धू सभा द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही।
मामा बाजार स्थित पूज्य बाबा गरीबदास दरबार मे आयोजित इस कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए भारतीय सिन्धू सभा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश वाधवानी ने बताया कि भाषायी दृष्टि से वैश्विक इतिहास में 21 फरवरी अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है, इसी दिन 1952 में वर्तमान बांग्लादेश और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में बंगला भाषा को मान्यता देने की मांग कर रहे युवा आंदोलनकारियों में से आठ युवा सरकार के आदेश से आंदोलन का दमन कर रही पुलिस की गोलियों से शहीद हो गए थे, उनकी स्मृति में वर्ष 1999 में यूनेस्को ने 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया।
इस अवसर पर सिन्धी म्यूजिकल ग्रुप द्वारा प्रस्तुत सिन्धी गीतों व भजनों की मधुर धुन ने उपस्थित जन को झूमने व थिरकने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के अंत मे पल्लव अरदास कर सभी ने कोरोना की वैश्विक महामारी से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना भी की।
इस अवसर पर राजेश वाधवानी, शंकरलाल कारड़ा, ओमप्रकाश पारप्यानी, आनन्द करारा, राजेश बत्रा, खेमचन्द गुरवानी, हासानन्द आहूजा, श्रीचंद रामरक्षानी,डॉ सत्यप्रकाश बत्रा, धमनदास गेही, कुमार नागदेव, कैलाश गेही, श्रीचंद पंजाबी, दीपक जैसवानी,राजू बालानी, चरण आहूजा, कैलाश पंजाबी, अमित कुकरेजा, नरेश बत्रा, अजय मोटवानी, धीरज दिसेजा, विशाल डेमला, वरुण केसवानी, विजय ठारानी, भावना गुरबख्शानी, कांता उधवानी प्रमुख रूप से उपस्थित थीं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजकुमार लाडकानी ने किया व आभार बी आर ज्ञानानी ने व्यक्त किया।
मस्तिष्क को अधिक विकसित करती है मातृभाषा-सबनानी
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