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मध्यप्रदेश भाजपा में जवान होते नेतापुत्रों की धूम

 

मध्यप्रदेश में भाजपा पिछले डेढ़ दशक से सत्तासीन है इस दौरान प्रदेश में बहुत कुछ बदल गया है ,यहां हम राजनीतिक सफलता या असफलता का विश्लेषण करने नहीं जा रहे बल्कि इस खबर में हमारा ध्यान भाजपा की उस पृष्ठभूमि पर रहेगा। जिसमें पार्टी की एक पीढ़ी युवावस्था को अलविदा कह प्रौढ़ या वृद्धावस्था की ओर बढ़ चली है तो एक पीढ़ी ने युवावस्था प्राप्त कर ली है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भाजपा में युवा तरुणाई ने दस्तक देदी है।
यह बात अलग है कि भाजपा में उभर रहे युवा नेतृत्व में सर्वाधिक चर्चा उन युवाओं की हो रही है जिनके पिता सत्ता में मुख्यमंत्री अथवा मंत्री हैं। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि भाजपा में उभर रहे युवा नेतृत्व में नेता पुत्र एक सामान्य युवा नेता की तुलना में अपना प्रचार प्रसार करने या स्वम् को स्थापित करने में कहीं आगे हैं। जन्मदिन हो कोई तीज त्योहार हो इन नेतापुत्रों के बड़े बड़े होडिग्स शहरों के प्रमुख चौराहों पर व्यवस्थित ढंग से चमकते देखे जा सकते हैं।

यही वजह है कि चुनावी वर्ष में इन्हें टिकिट दावेदार की संज्ञा भी दी जा रही है। चूंकि यह राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं तो इस चर्चा की को पूरी तरह नकारना भी सही नहीं होगा। लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित दल है यहां इस प्रयास को हाइकमान का ज्यादा समर्थन मिलेगा कहना सही नहीं होगा । यहां पारवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि रखने वालों से ज्यादा अपनी मेहनत अच्छी संगठन निष्ठा रखने वाले सामान्य कार्यकर्ता को आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है। प्रधानमंत्रीऔर राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचे मोदी और रामनाथ कोविंद इसका सबसे बड़ा उदाहरण कहे जा सकते हैं।

बावजूद इसके मध्यप्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन दोनो ही के लिए आने वाला चुनाव इस बात को लेकर कड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है कि युवावस्था को प्राप्त हो चुके परिवारजनों और बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के योग्यता की दम पर पार्टी के दरवाजे पर दस्तक दे रहे युवा कार्यकर्ता में से किसे मौका दिया जाए। पार्टी की अग्निपरीक्षा इस बात को लेकर भी होगी कि हमेशा अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दल पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाला दल स्वंम को इस राजनीतिक बुराई से अछूता रख पाता है या नहीं।
आइये नजर दौडाएं मध्यप्रदेश भाजपा के युवा हो चले नेतापुत्रों पर

कार्तिकेय सिंह चौहान

कार्तिकेय सिंह चौहार शिवराज सिंह चौहान के बेटे हैं। बुधनी में बीते पांच साल से सक्रिय हैं। चुनावी सभाएं भी लेते रहे हैं। बीजेपी के युवा मोर्चा में पदाधिकारी बनाए गए हैं। कोलारस-मुंगावली इलाके में हुए उपचुनाव में उनकी मौजूदगी ने चौंका दिया। इसे उनके राजनीति में आने का इशारा समझा जा रहा है।

आकाश विजयवर्गीय

आकाश, कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। पिता के विधानसभा क्षेत्र महू का पूरा काम आकाश ही देखते हैं। बीते विधानसभा चुनाव में भी आकाश को टिकट का दावेदार समझा जा रहा था। पांच साल में आकाश राजनीति के और भी पक्के खिलाड़ी हो गए हैं।

देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर

नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे हैं देवेंद्र प्रताप सिंह। बीते विधानसभा चुनाव में देवेंद्र का नाम टिकट दावेदारों में लिया जा रहा था, लेकिन तोमर उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष थे। इसलिए बेटे देवेंद्र का नाम दावेदारों से खुद तोमर ने हटा लिया। अब तोमर के सामने संकोच का कारण खत्म हो चुका है।

मुदित शेजवार

मुदित, गौरीशंकर शेजवार के बेटे हैं। गौरीशंकर शेजवार इस साल रिटायरमेंट के मूड में हैं। पिता के चुनावी क्षेत्र में वे काफी पहले से सक्रिय रहे हैं। इस बार उनकी सक्रियता ज्यादा दिखाई दे रही है। लिहाजा वे पिता के विधानसभा सीट से स्वाभाविक उम्मीदवार के तौर पर दिखाई दे रहे हैं।

तुष्मुल झा

तुष्मुल, प्रभात झा के बेटे हैं। ये बीजेपी की मंडलियों में अक्सर दिखाई देने लगे हैं। भोपाल में उनकी सक्रियता और मेल-मिलाप से उनकी दावेदारी की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। तुष्मुल बीजेपी युवा मोर्चा में भी पदाधिकारी हैं।

अभिषेक भार्गव

गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव राजनीति के पके हुए खिलाड़ी बन गए हैं। पिछले 10 साल से वे पिता के विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले चुनाव में तो पूरा चुनाव ही अभिषेक की रणनीति पर लड़ा गया।

सिद्धार्थ मलैया

जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ हमेशा ही पिता के जिम्मेदार बेटे रहे हैं। दमोह में चुनावी कामकाज सिद्धार्थ ही निपटाते हैं। धीर-गंभीर सिद्दार्थ को ताकत उनके पिता के साथ मां सुधा मलैया से भी मिलती है। इस बार फिर वे टिकट के दावेदार के रूप में नजर आ रहे हैं।

मौसम बिसेन

गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम बालाघाट में सक्रिय हैं। चुनाव लड़ने की चर्चा पिछली बार भी हो चुकी है। इसलिए इस बार दावा ज्यादा मजबूत है। मौसम के पिता के साथ उनकी मां रेखा बिसेन भी जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं।

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