नए साल की पहली ही सुबह माता वैष्णो देवी मंदिर से दुखद खबर मिली है। मंदिर परिसर में सुबह 2:45 बजे मची भगदड़ के चलते 12 लोगों की मौत हो गई है, इसके अलावा 26 लोग जख्मी हैं। इनमें से कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि यह हादसा तड़के 2:45 बजे हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट्स में हमें यह पता चला है कि कुछ लोगों के बीच बहस हुई थी और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद लोग भागने लगे, जिसके चलते यह हादसा हुआ। हादसे पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया है। फिलहाल वैष्णो देवी यात्रा की एक बार फिर से शुरुआत कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मौके पर पहुंचने वाले हैं।
प्रधानमंत्री ने शोक व्यक्त किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”माता वैष्णो देवी भवन में मची भगदड़ में लोगों की मौत से अत्यंत दुखी हूँ. शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं, दुर्घटना में घायल लोग शीघ्र स्वस्थ हों. मैंने जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से बात की और मौजूदा हालात की जानकारी ली.”इस घटना पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दुख जताया है। केंद्रीय गृहमंत्री ने ट्वीट कर कहा,’माता वैष्णो देवी मंदिर में हुई दुखद दुर्घटना से हृदय अत्यंत व्यथित है। इस संबंध में मैंने J&K के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा जी से बात की है। प्रशासन घायलों को उपचार पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस हादसे में जान गँवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ।’
चश्मदीदों ने बताया हाल
बीबीसी के मुताबिक एक श्रद्धालु ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए कटरा में बताया कि यह घटना रात लगभग 1 बजे के क़रीब अनियंत्रित भीड़ की वजह से हुई है.
उन्होंने बताया कि ‘अगर अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी कि मंदिर परिसर में अधिक भीड़ जमा हो रही है तो उन्होंने यात्रा रोकी क्यों नहीं, अगर यात्रा को समय पर रोक दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता.’
उन्होंने बताया कि इस घटना से कुछ समय पहले भी भीड़ अनियंत्रित हुई थी लेकिन उस समय भगदड़ नहीं मची, तंग रास्ता होने की वजह से दोनों ओर से श्रद्धालु पहले निकलना चाहते थे जिस कारण यह हादसा हुआ.
गोरखपुर के रहने वाले एक श्रद्धालु ने बीबीसी को बताया कि वो अपने परिवार और मित्र के साथ दर्शन के लिए आये थे.
उनके मुताबिक जिस समय यह हादसा हुआ वो भवन परिसर में कैंटीन के पास बैठे थे. भगदड़ के बाद जब उन्होंने सबको ढूंढा तो उनके साथ आये मित्र का कुछ पता नहीं चला.
उन्होंने बताया, “हमने 2 बजे से लेकर 6 बजे तक उन्हें ढूंढा जब नहीं मिले तो यहां अस्पताल आकर पता चला उनकी मौत हो गयी है.”
उनके साथी श्रद्धालु जो पेशे से डॉक्टर थे वो ग़लती से अपनी स्मार्ट वॉच पहनकर दर्शन करने चले गए थे. जब सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वापस लौटाया तो उस समय के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया था.