क्या मोदी कैबिनेट में एकमात्र मुस्लिम मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी के लिए अब भगवाधारी दल शार्ट कट के रास्ते संसद पहुंचने का मार्ग बंद करने का मन बना चुकी है ऐसा इसलिए क्यों कि भाजपा ने उन्हें अब तक राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया है इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. दो साल में एक बार राज्यसभा के होने वाले चुनाव 10 जून को हैं. बीजेपी ने राज्यसभा के लिए जिन उम्मीदवारों की घोषणा की है, उनमें नक़वी का नाम नहीं है.
बीजेपी ने राज्यसभा के उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी है. मुख़्तार अब्बास नक़वी की चर्चा भी मोदी कैबिनेट के एक और मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह यानी आरसीपी सिंह की तरह हो रही है. दोनों मंत्री हैं लेकिन सांसदी के बिना मंत्री का पद ख़तरे में दिख रहा है.
आरसीपी सिंह जेडीयू से हैं और जेडीयू ने जिन उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसमें उनका नाम नहीं है. आरसीपी सिंह की राज्यसभा की सदस्यता सात जुलाई को ख़त्म हो रही है.
वहीं मुख़्तार अब्बास नक़वी इसी साल मार्च में राज्यसभा से रिटायर हुए थे. बीजेपी ने उन्हें झारखंड से राज्यसभा भेजा था. मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा का सांसद बनना होगा. बीजेपी मुख़्तार अब्बास नक़वी को लेकर चुप है.
मुख़्तार अब्बास नक़वी मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं. नक़वी के बारे में यह भी अटकलें हैं कि उन्हे रामपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार बना सकती है.
रामपुर से नक़वी लोकसभा सांसद रहे भी हैं. अगर नक़वी सांसद नहीं बन पाते हैं तो बीजेपी में कोई भी मुस्लिम सांसद नहीं रहेगा. राज्यसभा में मुख़्तार अब्बास नक़वी, सैयद ज़फ़र इस्लाम और एमजे अकबर बीजेपी से सांसद थे. तीनों रिटायर हो चुके हैं.
रामपुर से समाजवादी पार्टी के आज़म ख़ान लोकसभा सांसद थे. उन्होंने सांसदी से इस्तीफ़ा दे दिया है और यूपी विधानसभा में चले गए हैं. रामपुर और आज़मगढ़ लोकसभा सीट पर उपचुनाव 23 जून को है.