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नागरिक सहकारी बैंक के चुनाव में सहकार भारती के पैनल ने लहराया विजयी परचम

प्रवीण दुबे
ग्वालियर /बैंकिंग क्षेत्र में 42 वर्षों से सक्रिय सहकारी संस्थान नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर के संचालक मंडल सदस्य पद हेतु  निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न हो गई। देर रात्रि निर्वाचन अधिकारी अशोक यादव ने विधिवत चुनाव परिणाम घोषित करते हुए 12 सदस्यों के चुने जाने की घोषणा की।
निर्वाचित घोषित किये गए सदस्यों के नाम

 

विनोद सूरी,महेंद्र अग्रवाल,संजीव गोयल, दिलीप अवस्थी,सुदर्शन गुप्ता, अतुल अधोलिया,सुशील जैन, किशोर घोटनकर,राजकुमार प्रजापति, मनीषा शर्मा,रचना सोलंकी,विनोद अष्टय्या। विजयी प्रत्याशियों में 9 सामान्य वर्ग से ,दो महिला वर्ग से और एक अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित किया गया है।
सहकार भारती के पैनल को मिली जीत
उल्लेखनीय है कि दो पक्षों के बीच सुलह की सारी कोशिशें विफल होने के कारण बैंक के इतिहास में दूसरी बार निर्वाचन के हालात निर्मित हुए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय नागरिक सहकारी बैंक के इतिहास में केवल एकबार छोड़कर अब तक आम सहमति से ही  निर्वाचन होते रहे । आरएसएस ने अपनी ओर से सहकारिता के लिए समर्पित संगठन सहकार भारती द्वारा समर्थित पैनल मैदान में उतारा था,जबकि परस्पर प्रतिद्वंद्वी पैनल ने खुद को कर्मठ  स्वयंसेवक प्रत्याशी निरूपित  किया था।
उल्लेखनीय है कि बैंक के दस हजार से अधिक सदस्यों को वोट डालने का अधिकार प्राप्त है इसी आधार पर 11 जून को प्रातः 9 से शाम 4 बजे तक मतदान कराया गया और देर रात चुनाव परिणाम घोषित किये गए। इनमें सहकार भारती द्वारा समर्थित पैनल के सभी प्रत्याशियों ने शानदार जीत हासिल की।
जिन्हें हार का सामना करना पड़ा उनमें 
राकेश केरवार,वंदना अरोरा,कविता जैन, त्रिलोक चन्द्र अग्रवाल, जगदीश कैबरे,रामनिवास गुर्जर, शिवनारायण गुप्ता, रविशंकर गोयल, चन्द्रप्रकाश चौरसिया, नितिन पाठक,नरेश चन्द्र शर्माऔर राकेश शर्मा शामिल हैं।
किसे कितने मत मिले
अधिकांश सदस्यों ने मतदान में नही दिखाई रूचि
उल्लेखनीय है कि बैंक में वोट डालने का अधिकार प्राप्त सदस्यों की संख्या 10024 थी जबकि निर्वाचन प्रक्रिया में मात्र 2440 सदस्यों ने ही भाग लिया। निर्वाचन प्रक्रिया में मतदान प्रतिशत का कम रहना यह साबित करता है कि अधिकांश सदस्यों ने मतदान में रुचि नहीं दिखाई इसका मुख्य कारण दोनों ही पैनलों से परस्पर आपसी लोगों का आमने सामने आना और चुनाव से पूर्व सर्वसहमति न बन पाना है।
यूं हुई बैंक की शुरुआत, ऐसे चढ़ी सफलता की सीढ़ियां
परस्पर मिलकर कार्य करने से सफलता मिलती है। ‘‘एक सबके लिये सब एक के लिये‘‘ जैसे उदार विचार से ही सहकारिता का प्रारंभ एवं संगठन खड़ा होता है। इस विचारों एवं आचारों से आर्थिक स्वावलम्बन प्राप्त करने के संकल्प ने ही ‘‘नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर‘‘ की नींव, ढांचा एवं साज सज्जा तैयार की। वर्ष 1978 में पंजीकृत नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर ग्वालियर की प्रथम शहरी सहकारी बैंक ने निर्धारित अर्हताओं को पूर्ण करते हुये भारतीय रिजर्व बैंक से अनुज्ञा-पत्र प्राप्त कर 28 अप्रैल 1980 में बैंकिंग व्यवसाय प्रारम्भ किया। स्थापना की प्रथम साधारण सभा में ही 6 प्रतिशत लाभांश वितरण किया जो सभी सदस्यों के लिए आश्चर्य का विषय था। प्रदेश के नागरिक बैंकों में द्वितीय स्थान प्राप्त यह बैंक सफलता पूर्वक गत 42 वर्षो से चल रही है। इस बैंक के रजत जयन्ती समारोह में प्रदेश के माननीय  श्री शिवराज सिंह चैहान एवं पूर्व सहकारिता मंत्री श्री गोपाल भार्गव आतिथ्य ग्रहण कर बैंक की प्रगति पर हर्ष एवं उन्नति के लिये शुभकामनायें व्यक्त कर चुके हैं।
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