Homeमध्यप्रदेशखत्म हुई नेताओं की होशियारी,अब जनता की बारी

खत्म हुई नेताओं की होशियारी,अब जनता की बारी

प्रवीण दुबे

दो सप्ताह से अधिक समय तक चले धूम धड़ाके से सराबोर चुनाव प्रचार का सोमवार की शाम चार बजे समापन हो गया।

इससे पूर्व सुबह से ही शहर के हर गली चौराहे पर प्रत्याशी और उनके समर्थक ढोल नगाड़ों के साथ अपने राजनीतिक दल का झंडा थामे जनता से वोट मांगते दिखाई दिए

इसे भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती ही कहा जायेगा कि क्या राजा ,क्या मंत्री सब सड़कों पर जनता के सामने हाथ जोड़े नजर आए।

सिंधिया और नरेंद्र सिंह की अगुवाई में निकले भाजपा के रोडशो ने शहर के रास्ते जाम कर दिए अन्य दलों ने भी अपनी ताकत व सामर्थ्य के अनुसार जनता को प्रभावित करने का भरसक प्रयत्न किया। बुधवार की सुबह तक मतदाता को तय करना होगा कि वह किसे अपना मत दे ।

दो सप्ताह के चुनाव प्रचार की समीक्षा की जाए तो इस दौरान राजनीति के तमाम रंग देखने को मिले अनुशासित दल होने की बात करने वाली भाजपा का उसके अपनों ने ही अनुशासन तार तार कर दिया।
18 से अधिक बागी प्रत्याशियों ने मैदान में उतरकर इस पार्टी के नीति निर्धारकों का मीजान जमकर बिगाड़ा।
कमोबेश यही हालात एकमात्र विपक्षी पार्टी कांग्रेस की भी रही लेकिन लोगों को इस दल के अंदरूनी घमासान पर इतना आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि वहां तो यह आम बात है।
लेकिन भाजपा में मचे घमासान पर मतदाता आश्चर्यचकित दिखे। शहरवासियों को सर्वाधिक आश्चर्य तो तब हुआ जब कार्यालय उदघाटन पर ही शहर के दमदार केंद्रीय मंत्री व शिष्ट सांसद का घेराव,नारेबाजी व अपनो की ही खरी खरी सुनते लोगों ने वायरल वीडियो में देखा।
चुनाव के बीच बड़े नेता कैसे रूठते हैं,कैसे छोटे कार्यकर्ता को माफी मांगनी पड़ती है कैसे सदभावना और समरसता की धज्जियां उड़ती हैं यह भी खूब देखने को मिला।
शहर की प्रथम नागरिक बनने का स्वप्न सजोए एक महिला प्रत्याशी के आंसुओं को भी इस दौरान शहर ने देखा ।
इस चुनावी शोरगुल के बीच भाजपा कांग्रेस को छोड़  पहले से स्थापित स्थापित हाथी छाप नीला दल गुम सा दिखाई दिया तो दिल्ली वाले झाड़ू छाप सफेद दल ने अपनी मजबूत उपस्थिति का अहसास अवश्य कराया।
चुनावी बातें और चकल्लस तो इतने सारे हैं की लिखते लिखते जगह कम पड़ जाएगी। अब इन सब बातों का कोई मतलब भी नहीं है क्यों कि अब बारी जनता की है हम तो यही कहेंगे।
ये पब्लिक है सब जानती है पब्लिक है
बाहर क्या है भीतर क्या है यह सबकुछ पहचानती है 
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