प्रवीण दुबे
राजनीति में खरीद फ़रोख्त का खेल इस कदर हावी हो गया है कि राजनीतिक दलों को अपने ही जीतकर आए नेताओं पर इतना विश्वास नहीं रहा कि वे पाला नहीं बदलेंगे ,न पार्टी के प्रति पूर्ण समर्पण न संगठन के प्रति दृढ़ निष्ठा केवल धन को प्राथमिकता के कारण ही य़ह सारी स्थिति निर्मित हुई है इससे न काँग्रेस अछूती है न भाजपा। लोकतंत्र के लिए इससे ज्यादा भयावह स्थिति क्या हो सकती है ग्वालियर मे बीते 72 घण्टों से यही कुछ देखने को मिल रहा है ।
इस समय ग्वालियर चंबल में अजब-गजब की राजनीति का खेल सुर्खियों में है। बीजेपी और कांग्रेस सभापति को बनाने के लिए अलग-अलग दांव पेच अपनाने में लगी हुई हैं। सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग के डर से दो दिन पहले बीजेपी ने अपने 34 पार्षदों को दिल्ली में बैठक के बहाने उन्हें हरियाणा के एक रिसॉर्ट में बाड़ेबंदी कर दी है।
कांग्रेस ने भी आनन-फानन में अपने सभी पार्षदों को एक होटल में एकत्रित किया जहां से कांग्रेस के सभी पार्षद बस द्वारा धार्मिक यात्रा पर रवाना हो गए। इसमें तीन निर्दलीय और एक बीएसपी के भी पार्षद शामिल हैं। धार्मिक यात्रा के नाम से कांग्रेस की भेजी गई बस में महापौर शोभा सिकरवार और उनके पति विधायक सतीश सिकरवार के साथ कांग्रेस के कई बड़े नेता इस बस में सवार होकर धार्मिक की यात्रा करने का बहाना लेकर रवाना हो गए हैं
कांग्रेस का दावा है कि उनके पास 29 लोगों का समर्थन है जिसमें 25 कांग्रेस के शामिल है इसके अलावा तीन निर्दलीय एक बीएसपी का उन्हें समर्थन है।गौरतलब है कि 5 अगस्त को ग्वालियर सभापति को लेकर वोटिंग होनी है और इसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस लगातार अपना सभापति बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।
यही वजह है कि 2 दिन पहले बीजेपी ने अपने सभी 34 पार्षदों को बस से दिल्ली के लिए रवाना कर दिया था लेकिन उन्हें दिल्ली ना ले जाकर हरियाणा की एक रिसॉर्ट में ठहराया गया है। जहां पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर के कमान सम्भालने की खबरें लगातार आ रही हैं l भाजपा को इस बात का संदेह सता रहा है कि कहीं कॉंग्रेस के लालच में आकर उसके पार्षद क्रॉस वोटिंग न करें उधर कॉंग्रेस को अपने पार्षदों की खरीद फरोख्त का डर सता रहा है लेकिन
सभापति के लिए भाजपा का पलड़ा भारी
ग्वालियर नगर निगम में 66 में से भाजपा के 34 पार्षद जीते हैं जबकि एक निर्दलीय का भी उन्हें समर्थन है जबकि कांग्रेस और उसके समर्थकों की संख्या 31 बताई जा रही है। ऐसे में सभापति के पद पर भाजपा के पार्षद का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है फिर भी आपसी फूट और खरीद-फरोख्त के चलते दोनों ही दल डरे हुए हैं इसीलिए वे अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर रहे हैं, जिससे उनके पार्षद सुरक्षित रह सकें।
