Homeग्वालियर अंचलग्वालियर गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि...

ग्वालियर गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि अटल जी जैसी शख्सियत न थी न आएगी

ग्वालियर गौरव दिवस पर CM शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा है कि अटल जैसे शख्सियत न थी न आएगी। वह ऐसे नेता था जिनका कोई विरोधी नहीं था। विपक्षी भी उनका सम्मान करते थे। मंच से CM शिवराज ने साफ शब्दों में कहा कि अटल जी का ग्वालियर विकास के पथ पर तेजी से चल रहा है। ग्वालियर विकास में भोपाल-इंदौर को पीछे छोड़ेगा।

मैं वादा करता हूं विकास में ग्वालियर को नंबर एक मैं और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाएंगे, लेकिन स्वच्छता में नंबर वन बनाने का संकल्प आप लें। ग्वालियर क्यों स्वच्छता में नंबर वन नहीं बन सकता। आप चाहें तो सब हो सकता है। इस मौके पर मंच से CM शिवराज ने ग्वालियर के चार्ट जिसमें विभिन्न प्रकार की कचौड़ियों, करेला चार्ट के बेडई, मंगोड़े के साथ ही बहादुरा के लड्‌डुओं का जिक्र किया।

– ग्वालियर गौरव दिवस के अवसर पर CM शिवराज ने ग्वालियर में एक भव्य अटल स्मारक बनाने की बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस भव्य बनाएंगे। इसके लिए जल्दी डीपीआर तैयार की जाएगी और उसे हम अंतिम रूप देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अटल जी हिंदी प्रेमी थे। उन्होंने अमेरिका में भी सबसे पहले हिंदी में भाषण दिया था। पर कुछ दल आज भी गुलाम मानसिकता में घिरे हैं। पर हम प्रदेश में हिंदी के महत्व को बढ़ाते जा रहे हैं।

नरेन्द्र तोमर ने कहा अटल जी की ऊंचाई का आंकन शब्दों में करना किसी भी बड़े साहित्यकार के लिए मुश्किल
– ग्वालियर गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने अटल जी के साथ बिताए समय को याद किया। उन्होंने कहा कि अटल जी की ऊंचाई का आंकन शब्दों में करना किसी भी बड़े साहित्यकार के लिए मुश्किल है। ग्वालियर एक ऐतिहासिक शहर है और अटलजी ने इसी भूमि पर जन्म लिया है। कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि अटल जी कहते थे कि मनुष्य से बड़ा कोई नहीं और मनुष्य के मन से बड़ा कोई नहीं, लेकिन छोटे मन और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं हो सकता।

सिंधिया बोले मेरा उनका खून का रिश्ता नहीं था, लेकिन उससे कम नहीं है
– ग्वालियर गौरव दिवस पर केन्द्रीय नागरिक उड्‌डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि अटलजी ने राजनीति की नई परिभाषा स्थापित की है। उन्होंने बताया कि राजनीति सत्ता और कुर्सी का खेल नहीं है बल्कि समाज सेवा, अध्यात्म है। उनका कथन भी याद किया जब वह कहते थे कि “मन हार कर मैदान नहीं जीते जाते और न ही मैदान जीतकर मन जीते जाते हैं’। सिंधिया ने कहा कि मेरा उनका खून का रिश्ता नहीं था, लेकिन उससे कम नहीं है। जब उनके निधन का समाचार सुना था तब मैं कांग्रेस में था। एक सभा संबोधित कर रहा था। जैसे ही बीच में अटलजी के गुजर जाने का समाचार मिला तो वहीं सभा स्थगित कर श्रृद्धांजलि दी। वो तब भी अटल थे और आज भी अटल हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments