765 ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण, मुफ्त दवा पाकर खिले चेहरे
नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में निःशुल्क स्वास्थ्य मेला शुरू
बीपी और शुगर की जॉंच कराने के लिए लगी लोगों की कतार
ग्वालियर। श्रद्धेय गुरुवाणी सेवा ट्रस्ट एवं लॉयंस क्लब्स ऑफ ग्वालियर की ओर से फूलबाग मैदान में नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा और निःशुल्क स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया जा रहा है।
कलश यात्रा के साथ शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को निःशु ल्क स्वास्थ्य मेले का भी शुभारंभ हुआ। मेडीकल कॉलेज के डीन अक्षय निगम, जेएएच के अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. राहुल सप्रा, सचिव डॉ. बृजेश सिंहल, पिंक मिशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रियवंदा भसीन, डॉ. डीके शाक्य, डॉ.अर्चना गोयल, रिटायर्ड जेल अधीक्षक सीपी शर्मा, कार्यक्रम संयोजक जय सिंह कुशवाह, डॉ. केशव पाण्डेय, अशोक पटसारिया एवं मुख्य यजमान अरविंद गोपेश्वर डंडौतिया (मुरैना) ने विधि विधान से स्वास्थ्य मेले का शुभारंभ किया। पहले दिन ही 756 लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया, कुछ मरीजों का जब डॉक्टरों ने परीक्षण कर उन्हें मुफ्त में दवाएं भी दीं तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सबसे ज्यादा लंबी कतार बीपी और शुगर जॉच के लिए लगीं।
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण
कथा स्थल पर ही सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का भी श्रीगणेश हुआ। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भक्तिमय वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया।
भक्त के वश में होते हैं भगवान
भगवान से अगर निश्छल प्रेम किया जाए तो वे निश्चित ही भक्त के वश में हो जाते हैं। प्रेम के वश में होकर ही भगवान को अनेक रूप धारण करने पड़े। क्योंकि भगवान सदैव भक्त के वश में होते हैं। कथा व्यास संत गोपाल दास महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन यह बात कही।
उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर करते हुए कहा कि कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह एक कल्पवृक्ष के समान है। भागवत ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण हैं वहीं साक्षात भागवत हैं। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भक्ति को पाने का यदि इस धरा धाम पर कोई साधन है तो केवल भगवान की लीलाएं। यही लीलाएं जीवन में सारे रोगों की एक औषधि हैं। भगवान रूपी इस औषधि को ग्रहण करने के लिए आपको अपने प्रभु की शक्ति पर विश्वास होना चाहिए।
संतश्री ने कहा कि परमभाव और शुद्धमन से जब कोई काम किया जाता है तब भगवान सदैव उसके पास आ जाते हैं। जो भगवान की शरण मांगते हैं भगवान उन्हें अपने पास बुला लेते हैं यही निष्काम भक्ति का प्रभाव है। भगवान तो भाव के भूखे हैं। जब भगवान मक्खन लगाने से खुश हो जाते हैं तो फिर आप सभी को मक्खन लगा सकते हैं। जीवन में सदैव सभी की प्रशंसा करते रहो, आलोचना और बुराईयों से बचो। पवित्र भाव से सभी को प्रशंसारूपी मक्खन लगाने से सारे काम बन जाते हैं। आपके मन और हृदय में भगवान का प्रेम है जो भक्ति के प्रवाह को बहाता है, इससे मन और हृदय में सदैव प्रभु के प्रति लगाव होता है और यही लगाव प्रभु को भक्त के वशीभूत करता है।
संचालन डॉ. प्रदीप कश्यप एवं सह संयोजक अजय चोपड़ा ने किया। सुनील गोयल, परीक्षित ऋतु सिंह सैंगर, जीएल भोजवानी, नितिन मांगलिक, प्रशांत बाजपेयी, प्रशांत जैन, दिनेश भल्ला, जितेंद्र भदौरिया, अनिल गॉधी, नितिन मिश्रा, संजय आचार्य, श्याम खंडेलवाल और भागीरथ धिया एवं हरीश पाल ने आरती की।