HomeVideoत्वरित टिप्पणी : बुरे काम का बुरा नतीजा

त्वरित टिप्पणी : बुरे काम का बुरा नतीजा

प्रवीण दुबे

बुरे काम का बुरा नतीजा आप सोच रहे होंगे आखिर यह प्रचलित कहावत आज क्यों याद आई तो हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं यह कहावत आज उस वक्त चरितार्थ हो उठी जब डॉन माफिया अतीक और उसका भाई अशरफ खून से लथपथ हो प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में ढेर हो गए ।यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। यूं तो बीते 40 वर्षों से अतीक अहमद उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था लेकिन सफेदपोश संरक्षण में पले बढ़े इस डॉन माफिया से टकराने का साहस किया तो सिर्फ योगी आदित्यनाथ ने। इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है। पूरा देश देख रहा है कि पिछले कई महीनों से अतीक अहमद खबरों में बना हुआ है पूरा का पूरा परिवार डॉन माफिया की कारगुजारीयों से

सराबोर नजर आता है आज भी अगर देखें तो उसकी पत्नी शाइस्ता कहां है किसी को नहीं मालूम पुलिस ने उस पर 25 हजार का  इनाम घोषित कर रखा है उसका लड़का असद और उसके साथी गुलाम कल ही एनकाउंटर में मारे गए इससे पहले भी डॉन माफिया के दो शूटर उस्मान और उसका एक साथी पुलिस ने   ढेर किया था।  एक माफिया डॉन की कारगुजारी  कैसे पूरे परिवार को अपने आगोश में ले लेती है और किस प्रकार से पूरा परिवार उसके दुष्परिणाम भुगतता है इसका प्रमाण बन गया है  अतीक अहमद।डॉन माफिया का यह घटनाक्रम   कई दृष्टि से महत्वपूर्ण कहा जा सकता है विश्लेषणात्मक ढंग से अगर कहा जाए तो अतीक अहमद जैसे गुंडे  एक-दो दिन में पैदा नहीं होते यह हमारी व्यवस्था हमारी राजनीतिक संरक्षण और सिस्टम की तमाम नाकामियों का प्रतीक होते हैं पिछले 40 वर्षों के दौरान अतीक के कई रूप देखने को मिलते हैं कभी वह समाजवादी पार्टी का नेता दिखा तो कभी बहुजन समाज पार्टी का कभी सांसद  तो कभी विधायक कभी उसने भूमाफिया बनकर  प्रयागराज से सटे अनेक शहरों में अतिक्रमण करके अपना रुतबा दिखाया,हथियारों के सौदागर से लेकर सुपाड़ी किलर तक उसके कई रूप सबने देखे वह अतीक ही था जिसने महज 12 वर्ष के अपने पुत्र असद के हाथों में पिस्टल पकड़ा कर खुलेआम फायरिंग कराते हुए फोटोशूट करवाई थी समय सदैव एक सा नहीं रहता आज वही अतीक जमींदोज हो गया है बुरा काम करने वाले का यही अंजाम होता है  देशवासियों के लिए यह घटना मन को झकझोर देने वाली है केवल इसलिए नहीं कि अतीक मारा गया या इसलिए भी चौंकाने वाली है कि हमारे सिस्टम हमारी व्यवस्था गुंडे बदमाशों के आगे किस प्रकार मजबूर हो जाती है, हमलावर पत्रकार बनकर आए और बड़ी पुलिस कस्टडी को भेदकर दो लोगों को गोलियों से भून डाला यह कैसे संभव हो गया ? क्या पुलिस को अपने सिस्टम अपनी विजिलेंस एजेंसियों से सूचना  नहीं मिली ? सवाल बहुत सारे लेकिन आज का सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि एक माफिया का अंत हो गया सवाल तो उठते ही रहेंगे और जवाब भी खोजे जाते रहेंगे लेकिन देश देख रहा है कि किस प्रकार गुंडे बदमाश उत्तर प्रदेश को अपने आगोश में जकड़े हुए थे योगी आदित्यनाथ पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश को माफिया मुक्त करने की शपथ लेकर काम कर रहे हैं और माफिया है कि खत्म ही नहीं हो रहा लगातार सनसनी फैलाता जा रहा है

 आज अतीक मारा गया तो उसे मारने वाले नए गुंडे पैदा हो गए आखिर कहां रुकेगा उत्तर प्रदेश में गुंडाराज का खेल लेकिन जो लोग यह करते हैं उन्हें नहीं मालूम कि उनका भी एक दिन वही हश्र होगा जो आज अतीक का हुआ बुरे काम का बुरा नतीजा योगी ने जो कहा वह कर दिखाया मिट्टी में मिल गया अतीक अशरफ और उसका माफिया राज।
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