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जब जल रहा था ग्वालियर तब इंदौर में क्रिकेट की चिंता में व्यस्त थे सिंधिया

जब सोमवार को ग्वालियर जातिगत हिंसा की आग में जल रहा था और ज्योतिरादित्य सिंधिया इंदौर के पांच सितारा होटल में एम पी सी ए की बैठक में मस्त थे देर शाम तक न तो उनका कोई बयान आया था और न ही उन्होंने बैठक छोड़कर हिंसाग्रस्त ग्वालियर अंचल में वापस लौटकर माहौल शांत कराने की कोई कोशिश की।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में शामिल होने ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार को इंदौर में थे वही सिंधिया जो आने वाले चुनाव में कांग्रेस के लिए मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं, वही सिंधिया जिनके खानदान में ग्वालियर अंचल की जनता के दुख के समय आंसू पोछने की गौरवशाली परम्परा रही है। उनके यहां राजमाता विजयाराजे हों या फिर पिता माधवराव अथवा दौलतराव सिंधिया हमेशा ग्वालियर को अपना परिवार मानकर उसके सुख दुख में साथ खड़े रहे।
उसी सिंधिया खानदान के ज्योतिरादित्य जो कि खुद को महाराज कहलाना पसंद करते है, अपने खानदान की इस परंपरा को शायद भूल गए हैं।
सोमवार को पूरा अंचल जातिगत हिंसा की आग में जल उठा था यहां इस हिंसा में जहां 7 लोगों की मौत हुई वहीं करोड़ों की सम्पति को जलाकर राख कर दिया गया अकेले ग्वालियर की ही बात करें तो यहां 3 मौतें गोली लगने से हुईं वहीं अंचल का सबसे बड़ा शहर होने के कारण यहां बने JAH हॉस्पिटल में घायलों का तांता लगा रहा।
इतना सब होने के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया कहीं नजर नहीं आये आखिर कहां थे सिंधिया तो हम बताते हैं आपको , सिंधिया सोमवार की सुबह से ही मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में व्यस्त थे  इधर ग्वालियर जल रहा था और उधर सिंधिया को यहां पहुँचकर ग्वालियर के जख्मों पर मरहम लगाने की फुरसत नहीं थी।
ऐसा नही  कि सिंधिया को इसकी खबर नहीं थी देशभर के समाचार चैनल ग्वालियर में फैली जातिगत हिंसा के तांडव को लगातार    दिखा रहे थे। बावजूद इसके सिंधिया ने  देर शाम तक न केवल बैठक में हिस्सेदारी की बल्कि इसके बाद इंदौर के पांच सितारा होटल में आराम से सो गए। सिंधिया यदि चाहते तो सुबह से रात तक केवल दो घण्टे में ग्वालियर पहुंचकर लगातार तनावपूर्ण होती स्थिति को सामान्य करने, घायलों को सही इलाज उपलब्ध कराने और मृतकों के परिवार वालों के बीच दो आँसू टपकाने की मानवीयता दिखा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया हालांकि देर शाम अखबारों के दफ्तरों में यह सिंधिया ने शांति बनाए रखने की अपील जरूर की जो कि महज एक औपचारिकता मात्र थी।
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