महाराष्ट्र का ऐतिहासिक शहर औरंगाबाद शुक्रवार रात मजहबी उन्मादियों की भेंट चढ़ गया. शुक्रवार शाम तक शहर बिलकुल शांत था लेकिन शहर की जनता को नहीं पता था कि अब यहाँ उन्मादियों का नंगा नाच देखने को मिलेगा. खबर के मुताबिक़, शाम 6 बजे औरंगाबाद के शाहगंज के एक फल की दुकान पर लेनदेन को लेकर दो लोगों में झगड़ा हुआ. इसके बाद पानी का बहाना करके मजहबी उन्मादी इकट्टा हुए और पूरे क्षेत्र में हिंसा, तोड़ फोड़, आगजनी शुरू कर दी. इसके बाद देखते ही देखते शाहगंज के अलावा गांधीनगर और राजाबाजार क्षेत्र भी आक्रान्ताओं के कहर की भेंट चढ़ गये. आक्रान्ताओं ने लगभग 50 दुकानों तथा इतने ही वाहनों को आग लगा दी. आक्रान्ताओं के इस हमले में 50 से ज्यादा लोग घायल हो गये. जब पुलिस ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश तो ये उन्मादी पुलिस पर भी कहर बनकर टूट पड़े तथा लगभग 15 पुलिसवालों को घायल कर दिया.
औरंगाबाद वो महारष्ट्र का वो क्षेत्र है असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का गढ़ माना जाता है तथा पूरा इलाका ओवैसी के पोस्टर बैनरों से पटा रहता है. औरंगाबाद हिंदुत्व के महानतम योद्धा संभाजी महाराज की नगरी है. औरंगाबाद में दंगा फ़ैलाने वालों में बांग्लादेशी तथा रोहिंग्याओं के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि औरंगाबाद से कई बार रोहिंग्याओं को देश में बसाने की आवाज उठती रही है.
औरंगाबाद के जिन शाहगंज, गांधीनगर तथा राजाबाजार में मजहबी उन्मादियों ने कहर ढहाया है ये सभी क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माने जाते हैं. इन क्षेत्रों में आये दिन लूट, डकैती, ह्त्या, हिंसा की घटनाएँ होती रहती हैं.