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आज ओलंपिक हॉकी की ऐतिहासिक सफलता के पीछे है ग्वालियर के बेटे का बड़ा योगदान

प्रवीण दुबे
अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी दो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व कर चुके ग्वालियर के शिवेंद्र सिंह हैं आज ओलंपिक का कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सहायक प्रशिक्षक ।
उनकी मां श्रीमति राधा देवी  बेटे की उपलब्धि पर हैं गदगद, शब्दशक्ति न्यूज से उन्होंने की खास बातचीत 
घर में है खुशी का माहौल
भारत के लिए जब जब हॉकी से जुड़ी कोई बड़ी उपलब्धि सामने आती है उसके पीछे कहीं न कहीं ग्वालियर का नाम जरूर जुड़ा होता है। हॉकी के स्वर्णिम काल में जहां हॉकी के जादूगर ध्यानचंद और महान हॉकी खिलाड़ी रूपसिंह की कर्मस्थली ग्वालियर ही था और यहीं से इन्होंने हॉकी की बारीकियां सीखी थीं, और अब आज जब पेरिस ओलंपिक में भारत ने लगातार दूसरी बार कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा है तो इसके पीछे भी ग्वालियर का बहुत बड़ा योगदान है वह योगदान यह है कि जिस हॉकी टीम ने यह शानदार उपलब्धि प्राप्त की है उस टीम को प्रशिक्षित करने का काम ग्वालियर के ही बेटे अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे शिवेंद्र सिंह चौधरी ने ही किया है वह इस समय भारतीय हॉकी टीम के सहायक प्रशिक्षक हैं और उन्होंने विजयी भारतीय टीम की प्रतिभा को निखारने का काम किया।
अपने गृहनगर ग्वालियर की हॉकी अकादमी में शुभचिंतक अविनाश भटनागर के साथ हॉकी के गुर सिखाते शिवेंद्र सिंह 
इस समय शिवेंद्र सिंह भारतीय हॉकी टीम के साथ पेरिस में हैं लेकिन उनके बतौर प्रशिक्षक रहते भारतीय टीम ने जो उपलब्धि हासिल की है उससे उनके तानसेन नगर स्थित परिवार सहित सभी शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई है इन सभी ने आज जोरदार जश्न मनाया और शिवेंद्र सिंह को बधाई प्रेषित की है।
उनकी मां श्रीमती राधादेवी ने shabshaktinews से चर्चा की तो वे बेहद प्रसन्न दिखाई दी उन्होंने कहा कि पूरे परिवार ने बैठकर एक साथ मैच देखा और जैसे ही भारत जीती उन्होंने बेटे शिवेंद्र को मोबाइल पर बधाई दी।
खुशी से गदगद श्रीमती राधादेवी ने बताया कि कल शिवेंद्र के पिताजी का जन्मदिन है अतः जब पिताजी ने उनसे बात की तो शिवेन्द्र बोला कि देखो पिताजी भारत ने जीत हासिल करके आपको एक दिन पहले ही बधाई दे दी है।
माता जी ने बताया कि पूरे घर में खुशी का माहौल है और लोग मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं।
हॉकी के लिए अपनी खास पहचान रखने वाला ग्वालियर शहर एक बार फिर से रोशन हुआ है। ग्वालियर शहर के तानसेन नगर में रहने वाले भारतीय हॉकी टीम के मशहूर खिलाड़ी रहे  शिवेंद्र सिंह  द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त हैं।
शिवेंद्र सिंह ने ग्वालियर में रहकर ही हॉकी खेलना सीखा और शिवेंद्र सिंह को हॉकी खेलने की प्रेरणा ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह और ध्यानचंद से मिली थी। शिवेंद्र सिंह हॉकी की नेशनल टीम के सहायक कोच हैं और इस समय वह पेरिस में हैं। जहां ओलंपिक चल रहा है।

हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की नगरी ग्वालियर में शिवेंद्र सिंह का जन्म हुआ। परिवार में हॉकी खिलाड़ी शिवेंद्र सिंह के दो बड़े भाई हैं, जो माता-पिता के साथ रहते हैं। शिवेंद्र की मां राधा देवी बताती हैं कि जब वह नौ साल का था, तब पहली बार उसने हॉकी की स्टिक पकड़ी थी। साल 2006 में जब पहली बार भारतीय टीम में चयन हुआ, तब सोचा शायद ओलंपिक खेलने का सपना पूरा हो सकता है। उसके बाद अपने सपनों को पूरा करते हुए अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्लेयर शिवेंद्र सिंह दो बार ओलंपिक खेल चुके हैं और कई अंतरराष्ट्रीय खिताब और मेडल अपने नाम कर चुके हैं।

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