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मध्यप्रदेश में कर्जा बना सिरदर्द अब फिजूलखर्ची रोकने 33 विभागों की 70 से अधिक योजनाओं पर वित्तीय पाबंदी

मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार के लिए 4 लाख करोड़ का कर्जा अब सिरदर्द बनने लगा है खुद हवाई जहाज में फर्राटे भरने वाली सरकार अब फिजूल खर्ची रोकने के लिए अब जनता से जुड़ी योजनाओं में कटौती करने का मन बना रही है खबर है कि  वित्त विभाग ने 33 विभागों के 70 से अधिक योजनाओं पर वित्तीय पाबंदी लगा दी है.

आर्थिक संकट से जूझ रही मध्यप्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने अब फिजूलखर्ची रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. दरअसल वित्त विभाग ने 33 विभागों के 70 से अधिक योजनाओं पर वित्तीय पाबंदी लगा दी है. इन योजनाओं के लिए पैसा खर्च करने से पहले वित्त विभाग की हरी झंडी लगेगी. यानी कि वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही विभाग इन योजनाओं में पैसे खर्च कर सकेंगे. जिन योजनाओं पर वित्तीय पाबंदी लागू की गई है वह सीधे आम व्यक्ति से ताल्लुक रखती हैं वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में यह बताया गया है कि ये पाबंदी मार्च 2025 तक लागू रहेंगी. मतलब साफ है कि नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले तक ये रोक इसी महीने से लागू रहेंगी.

इन योजनाओं पर पड़ेगा प्रभाव

मध्यप्रदेश में अब सड़क मरम्मत,शहरी सड़कों के सुधार के लिए कायाकल्प योजना,पीडब्ल्यूडी की सड़कों के सुधार, उन्नयन, डामरीकरण और नवीनीकरण के लिए वित्त विभाग की अनुमति जरूरी होगी. मुख्यमंत्री बालिका स्कूटी योजना,लाखों किसानों में बंटने वाला एक हजार करोड़ के करीब बोनस का पैसा,मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,संबल योजना अब वित्त विभाग की बिना मंजूरी के खजाने से नहीं निकलेगा, सीएम सोलर पंप स्कीम, बेरोजगार युवक- युवतियों को रोजगार की ट्रेनिंग, उच्च शिक्षा के लिए विदेश अध्ययन, तीर्थ यात्रा योजना के लिए भी वित्त विभाग की अनुमति जरूरी होगी.

मध्यप्रदेश सरकार वित्तीय प्रबंधन में जुटी हुई है. फिलहाल एमपी सरकार ने 4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज ले रखा है. अगस्त महीने में सरकार दूसरी बार कर्ज लेने जा रही है. इस तरह से सिर्फ एक महीने में सरकार 10 हज़ार करोड़ का कर्ज ले लेगी. लगातार कर्ज लेने के बाद अब जनता से जुड़ी योजनाओं में कटौती देखने को मिल सकती है.

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