प्रवीण दुबे
महाराष्ट्र में आज रात्रि 12 बजे से प्लास्टिक पन्नी और प्लास्टिक निर्मित तमाम सामग्री पर कड़ाई से रोक लग जाएगी अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में जहां जनजीवन पूरी तरह प्लास्टिक पर निर्भर हो गया है वहां कब महाराष्ट्र जैसे राज्य की इस जनउपयोगी पहल का अनुसरण किया जाएगा। सर्वविदित है कि मध्यप्रदेश में कईबार प्लास्टिक से होने वाले दुष्परिणाम की जानकारियां सामने आती रहती है। ग्वालियर में प्लास्टिक पन्नियों को खाने से बड़ी संख्या में गायों की मौत होने की खबरें सामने आती रही हैं।विशेषज्ञ कहते हैं कि प्लास्टिक निर्मित सामग्री में खाने पीने की वस्तुओं का उपयोग करने से कैंसर जैसे जानलेवा रोग सामने आ रहे हैं। कई बार ग्वालियर में स्थानीय प्रशासन ने प्लास्टिक पन्नियों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए लेकिन यह आदेश कागजी बन कर रह गए। अब महाराष्ट्र ने प्लास्टिक पर रोक की जो रणनीति बनाई है वह काबिलेतारीफ कही जा सकती है इसमें सजा और जुर्माने तक का प्रावधान है। एक अच्छी बात यह भी है कि इस आदेश को पालन कराने के लिए 250 इंस्पेक्टर को तैनात किया गया है।
आइये जाने महाराष्ट्र की इस जनहितकारी पहल के बारे में
महाराष्ट्र में एक बार इस्तेमाल कर फेंक दिए जाने वाली प्लास्टिक पर 23 जून की मध्य रात्रि से पाबंदी लागू हो रही है. इसके लिए मुंबई में जोरदार तैयारी की गई है. प्रतिबंधित प्लास्टिक के साथ पाये जाने वालों पर कार्रवाई करने के लिए 250 इंस्पेक्टरों का विशेष दस्ता बनाया गया है. इसके अलावा वैकल्पिक सामानों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है.
वर्ली के एन.एस.सी.आई में आयोजित प्रदर्शनी के जरिये बीएमसी की कोशिश ये बताने की है कि प्लास्टिक के बिना भी जिंदगी जी जा सकती है. प्रदर्शनी के उद्घाटन के लिए नेताओं के साथ-साथ अभिनेता अजय देवगन और काजोल को भी बुलाया गया था. अजय देवगन ने जहां लोगों से प्लास्टिक मुक्ति के इस अभियान से जुड़ने की अपील की, वहीं काजोल ने भी अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए बैंक बैलेंस और मकान के साथ एक बेहतर दुनिया देने की अपील की.
तकरीबन 100 स्टॉलों में कागज के सुंदर मंडप, कपड़ों की तरह-तरह की थैली से लेकर, सुपारी के प्लेट, चम्मच, ग्लास और डब्बों के साथ कागज के स्ट्रा तक उपलब्ध हैं. एक चम्मच तो ऐसा भी था, जिससे खाना खाने के बाद उसे भी खाया जा सकता है. अनाज से बने चम्मच सादे और चोकलेट जैसे अलग-अलग स्वाद में उपलब्ध हैं.
प्लास्टिक पर पाबंदी की बात सुन सबसे पहला सवाल उठता है कि बारीश में कैसे काम चलेगा? तो इसका जवाब है स्टार्च से बनी थैलियां. बायो ग्रीन के सीईओ मोहम्मद सादिक ने बताया कि फल और सब्जियों के स्टार्च से बनी थैलियां वाटर प्रूफ और पर्यावरण के अनुकूल भी हैं. हालांकि इसके बाद भी कुछ सवाल हैं जिनके जवाब अभी मिलने बाकी हैं. मसलन तरल पदार्थ के खुदरा विक्रेता क्या करें? ऐसे व्यापारी प्रदर्शनी में अपना जवाब ना परेशान दिखे.
लेकिन बात पर्यावरण की है. इसलिए सरकार अपने फैसले पर अडिग है. शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि 23 जून से प्लास्टिक पर पाबंदी हर हाल में लागू होगी. पाबंदी प्रभावी तरीके से लागू हो इसलिए बी एम सी ने 250 इंस्पेक्टरोंका खास दस्ता बनाया है, जो 24 जून से प्रतिबंधित प्लास्टिक के साथ पाये जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.