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भाजपा से भी बनाया जा सकता है नया उपराष्ट्रपति ये नाम चर्चा में 

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखकर उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है. जाहिर है कि अब धनखड़ की वापसी की बची खुची उम्मीद भी खत्म हो चुकी है. संविधान के अनुच्छेद 68 के तहत, उनके उत्तराधिकारी का चुनाव छह महीने के भीतर, यानी सितंबर 2025 तक पूरा करना अनिवार्य है.

भाजपा से भी बनाया जा सकता है नया उपराष्ट्रपति ये नाम चर्चा में

बीजेपी और आरएसएस के बीच पार्टी अध्यक्ष को लेकर लगातार मंथन हो रहा है. इस बीच तमाम तमाम ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि निर्मला सीतारमण और वसुंधरा राजे जैसे नामों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है.  हालांकि,देश की राष्ट्रपति एक महिला के होने के चलते ज्यादा उम्मीद है कि पुरुष उम्मीदवार को प्राथमिकता मिल सकती है.

इनमें राजनाथ सिंह का नाम सबसे ऊपर चल रहा है.यद्यपि सिंह को उपराष्ट्रपति बनाए जाने के पीछे कोई आधार नहीं दिख रहा है. क्योंकि वो बीजेपी के बहुत से रायते साफ करते रहते हैं. उन्होंने केंद्र में अपनी महत्ता बनाए रखी है. दूसरे व मोदी व शाह के नेतृत्व को स्वीकार कर चुके हैं. इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय में चल रहे कई प्रोजेक्ट्स में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका उनकी उम्मीदवारी को कमजोर करती है.

केंद्रीय सड़क परिवहन  नितिन गडकरी का भी नाम उपराष्ट्रपति पद के दावेदारों में लिया जा रहा है.इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर किए जा रहे उनके कार्यों से सरकार की लोकप्रियता बढ़ी है.साथ ही आरएसएस की पृष्ठभूमि उनकी उपराष्ट्रपि बनने की  संभावना को जीरो करती है.

निर्मला सीतारमण को उनके महिला होने और साऊथ का होने के चलते लाभ मिल सकता है. लेकिन राष्ट्रपति के रूप में पहले से ही एक महिला होने के कारण उनकी संभावना भी कम हो जाती है.

जे.पी. नड्डा BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. जिनका कार्यकाल मार्च 2025 में समाप्त हो रहा है. उनकी निकटता मोदी-शाह से है. अगर आरएसएस और बीजेपी के बीच सब कुछ ठीक नहीं हो सका है तो ये संभव हो सकता है कि उन्हें उपराष्ट्रपति बना दिया जाए. गौरतलब है कि नड्डा के एक बयान के बाद ही आरएसएस और बीजेपी के बीच दूरियां आ गईं थीं. कहा जाता है कि नड्डा के बयान के चलते ही आरएसएस ने 2024 के लोकसभा चुनावों से अपने को अलग कर लिया था. इस बीच बीजेपी में जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा नाम भी बहुत तेजी से उभरा है. पर उनका सवर्ण (भूमिहार) और यूपी से होना उनके लिए विपरीत साबित हो रहा है.

सहयोगी दलों को ध्यान में रखते हुए 3 नाम

एनडीए के पास लोक सभा में 293 और राज्य सभा में 112 सांसद हैं, जो कुल 405 वोट बनाते हैं, जो जीत के लिए आवश्यक 394 वोटों से अधिक है. यह बहुमत सरकार को अपने पसंदीदा उम्मीदवार चुनने की स्वतंत्रता देता है. पर बिना सहयोगी दलों के समर्थन के बीजेपी कुछ नहीं कर सकती है.  एनडीए में जनता दल (यूनाइटेड) (जद(यू)), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), और शिवसेना जैसे सहयोगी शामिल हैं. गठबंधन के साथियों का विश्वास हासिल करने के लिए बीजेपी हरिवंश नारायण सिंह के नाम को आगे बढ़ा सकती है. जाहिर है कि इस फैसले से बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों एनडीए की एकता मजबूत हो सकती है.

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