लगभग एक पखवाढे तक चले गणेश उत्सव और आज अनंत चतुरदशी तथा गणेश विसर्जन की धूम के बाद कल 7 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है महत्वपूर्ण बात यह है कि.पितृपक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के साथ हो रही है यूं तो चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन यह धार्मिक और ज्योतिषीय तीनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका सीधा प्रभाव देश-दुनिया की गतिविधियों से लेकर पूजा-पाठ और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है।
हिंदू धर्म में इसे अशुभ अवधि के रूप में जाना जाता है, इसलिए इसके आरंभ से समापन तक कई नियमों का पालन किया जाता है। हालांकि, खगोलशास्त्रियों के लिए यह आकाशीय घटनाओं को समझने का अवसर होता है। वहीं ज्योतिष में इसका असर 12 राशियों और 27 नक्षत्रों पर पड़ता है, जिससे कुछ जातकों को लाभ, तो कुछ की परेशानियां बढ़ने लगती हैं।
इस वर्ष 7 सितंबर 2025 को साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इसका दृश्य भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ऐसे में आइए इसके समय, प्रभाव, सूतक काल और उपायों को विस्तार से जानते हैं।
चंद्र ग्रहण 2025 प्रारंभ और समापन
कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
सूतक काल समय