ग्वालियर/स्व. श्री श्याम बिहारी मिश्रा वरिष्ठ अधिवक्ता की पुण्यस्मृति में आज एक गरिमामयी विधि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का विषय था – “अधिवक्ता के व्यावसायिक एवं नैतिक विकास में बार–बेंच की भूमिका”,इस अवसर पर माननीय श्री न्यायमूर्ति आनन्द पाठक, माननीय श्री न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलुवालिया तथा माननीय श्री न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।


कार्यक्रम में श्री ललित किशोर प्राचार्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर, श्री जय प्रकाश मिश्रा सदस्य, मध्यप्रदेश राज्य बार कौंसिल), श्री पवन पाठक अध्यक्ष, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर तथा श्री महेश गोयल सचिव, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्री जगदीश प्रसाद शर्मा पूर्व लोक अभियोजक द्वारा स्व. श्री श्याम बिहारी मिश्रा का जीवन परिचय प्रस्तुत करने से हुआ। इसके उपरांत श्री पवन पाठक ने स्वागत उद्बोधन दिया।
माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार निरंकारी ने विषय पर विचार रखते हुए कहा कि उन्होंने अपनी विधिक अभ्यास यात्रा स्व. श्री श्याम बिहारी मिश्रा के मार्गदर्शन में प्रारंभ की। वे उनके गुरु थे और उन्होंने तीन मूल मंत्र दिए – कड़ी मेहनत, तार्किक शक्ति एवं बड़ों का सम्मान – जिन्हें उन्होंने अपने जीवन और पेशे में हमेशा आत्मसात किया।
माननीय न्यायमूर्ति श्री गुरपाल सिंह अहलुवालिया ने कहा कि एक सुदृढ़ समाज के लिए अच्छे अधिवक्ताओं की आवश्यकता होती है। अच्छे अधिवक्ता, जिनके पास विधि का गहन ज्ञान हो, समाज की समस्याओं एवं पीड़ाओं को न्यायालय के समक्ष उचित ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
माननीय न्यायमूर्ति श्री आनन्द पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि अधिवक्ता का व्यवसाय अत्यंत श्रमसाध्य और निरंतर बौद्धिक परिश्रम की माँग करने वाला है। ऐसे में एक अधिवक्ता के लिए उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य और संतुलित मानसिक स्थिति अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही अधिवक्ता लंबे समय तक कुशलतापूर्वक कार्य कर सकता है और मानसिक स्वास्थ्य उसे तर्कशक्ति तथा निर्णय क्षमता प्रदान करता है। न्यायमूर्ति पाठक ने यह भी बलपूर्वक कहा कि अधिवक्ता को अपने पेशे में निरंतर विधि ज्ञान का अर्जन करते रहना चाहिए। गहन अध्ययन, सतत् अभ्यास और स्वस्थ जीवनशैली ही अधिवक्ता को समाज और न्यायालय के समक्ष अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने योग्य बनाती है।
यह व्याख्यान न केवल स्व. श्री श्याम बिहारी मिश्रा की स्मृति को जीवंत करता है, बल्कि अधिवक्ता समुदाय को उनके जीवन मूल्यों और पेशेवर सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करता है।