प्रयागराज 24 जनवरी 2026/प्रयागराजके माघ मेले में शांति के बीच इन दिनों विवाद की खट्टी-मीठी सुगबुगाहट गूंज रही है। 6 दिनों से चल रहे तनाव ने अब नया मोड़ ले लिया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद का केंद्र बन चुका है, जिसमें सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे आमजन की नजरों में हैं। इस बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के अंदर और बाहर कुल 12 सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं।
शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने बताया कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है। उनका कहना है कि सड़क पर बैठे शंकराचार्य और उनके अनुयायियों की जान खतरे में है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन और उसके गुंडे हमारे आसपास घूम रहे हैं। रात में आकर वीडियो बनाते हैं और पकड़े जाने पर कहते हैं कि नोटिस देने आए हैं।

स्वास्थ्य में गिरावट, दवा से मिली राहत
अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत अभी भी ठीक नहीं है। शुक्रवार की रात उन्हें दवा लेनी पड़ी। गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी थी और उन्हें तेज बुखार हुआ। बावजूद इसके उन्होंने अपनी आवाज बनाए रखी और प्रशासन के खिलाफ अपनी बात कही।
डिप्टी सीएम केशव मौर्य को बताया समझदार नेता
अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे नेता को मुख्यमंत्री होना चाहिए जो अफसरों की गलती को समझ सके और अकड़ में न बैठें। यह बयान तब आया जब डिप्टी सीएम ने कहा था कि “शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे स्नान करने की प्रार्थना करता हूं।”
मौनी अमावस्या के दिन हुआ विवाद
दरअसल, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें पैदल जाने के लिए रोका। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। नाराज शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
मेला प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनकी शंकराचार्य पदवी पर सवाल उठाए गए, जबकि दूसरे में मौनी अमावस्या पर हुए बवाल के लिए जवाब मांगा गया। प्रशासन ने चेतावनी दी कि क्यों न उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों के जवाब दे दिए। इस विवाद ने माघ मेले के आयोजन में सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों की अहमियत को फिर से उजागर कर दिया है
