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वामपंथी उग्रवाद पर अमित शाह की ललकार ये नरेन्द्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा

नई दिल्ली 30 मार्च 2026/गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों पर चर्चा के दौरान अपना संबोधन दिया। इस दौरान शाह ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली।

अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं इतना ही पूछना चाहता हूं कि नक्सलवाद को जो लोग यहां पर वकालत कर रहे थे कि ये 70 से अब तक क्यों नहीं मिला। पूरे देश को 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर मिला, गैस मिला, शुद्ध पीने का पानी मिला, 5 लाख तक का स्वास्थ्य का बीमा मिला, प्रति व्यक्ति, प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज मिला, लेकिन ये बस्तर वाले क्यों छूट गए थे।’

शाह ने कहा, ‘ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक का परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। मोदी सरकार में आज वो परछाई हट गई है, और इसलिए आज बस्तर विकास कर रहा है। ये नरेन्द्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाबवामपंथी उग्रवाद चुकता होगा।’

शाह ने अपने संबोधन में इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘वामपंथी विचारधारा के कारण ये नक्सलवाद फैला है, राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने भी स्वीकार की थी। मनमोहन सिंह ने पूरे देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की तुलना में भी देश में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवादी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’

अमित शाह ने वामपंथी संगठनों से पूछा कि आपका लड़ने का तरीका क्या है, हम अंग्रेजों के शासन में नहीं रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से तुलना ऐसे लोगों से कर दी, जो अक्षम्य है। आपलोग क्या हिमाकत कर रहे हैं।  शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, और आप उनकी तुलना संविधान तोड़कर, हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं?

उन्होंने कहा, ‘नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन पूरे क्षेत्र में सालों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं है, वो वैचारिक है। हम लोकतंत्र में हैं, हमने इस देश की संविधान को स्वीकार किया है। अन्याय किसी को भी हो सकता है, विकास कहीं पर भी कम ज्यादा हो सकता है। अगर आप धमकाना चाहते हैं कि ये होगा तो ये भी हथियार उठाएंगे, वो होगा तो वो भी हथियार उठाएंगे। लेकिन कान खोलकर सुन लीजिए, ये डरने वाली सरकार नहीं है, सभी के साथ न्याय करने वाली सरकार है।’

नक्सलवाद की शुरुआत का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, ‘1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी, बंगाल से हुई। 1971 के एक ही वर्ष में 3620 हिंसा की घटनाएं वहां पर हुई। 1980 का दशक आते आते पीपल्स वार ग्रूप बन गया और फिर ये महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा, ये तीन राज्यों में फैले। 1970 से 2004, ये पूरा कालखंड में 4 साल छोड़कर पूरा समय कांग्रेस पार्टी का शासनकाल रहा है, ये उनको याद रखना चाहिए।’

शाह ने कहा, ‘आज मैं इस मंच से देश की जनता को बताने आया हूं कि माओवादी हिंसा करने वालों और नक्सली हिंसा करने वालों के अब दिन लद गए हैं।’

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