मशहूर सिंगर आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया. मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि की है.
आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के बाद शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
शरीर चला जाता है, लेकिन कुछ आवाज़ें हवा में ठहरी रह जाती हैं, दूर तक, देर तक, कभी-कभी हमेशा के लिए. ‘नया दौर’ से ‘तीसरी मंज़िल’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ से ‘उमराव जान’ और ‘इजाज़त’ से होते हुए ‘रंगीला’ तक… वक़्त बदला, मंज़र बदले, पीढ़ियां बदली, पर्दे पर नायिकाएं बदली, पर आशा भोसले की आवाज़ हमेशा जवान रही.
लेकिन उनकी आवाज़ की शोखियों और चुलबुले गीतों के ज़िक्र में अक्सर उनके लंबे और कठिन संघर्ष की बात कम होती है. सच तो यह है कि अपनी विलक्षण प्रतिभा के बावजूद, आशा भोसले को ‘नंबर दो’ के पायदान से ही संतोष करना पड़ा, क्योंकि हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में ‘नंबर एक’ पर उनकी अपनी ही महान और दिग्गज बड़ी बहन, लता मंगेशकर थीं.