नई दिल्ली 2 मई 2026/केंद्र सरकार निजी क्लिनिकों और डॉक्टरों की सेवाओं में पारदर्शिता लाने की तैयारी में है। इसके तहत, डॉक्टरों की योग्यता से लेकर फीस तक सब कुछ डिस्प्ले करना होगा। यह जानकारी अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी लिखनी होगी, ताकि मरीजों को पहले से पता चल जाए कि इलाज का खर्च कितना आएगा। इससे मरीजों के परिजनों को फैसला लेने में आसानी होगी।
सरकार चाहती है कि मरीजों को डाक्टरों की योग्यता रजिस्ट्रेशन नंबर और सेवा का समय भी दिखाई दे। यानी मरीज को यह जानने के लिए पूछताछ न करनी पड़े कि डॉक्टर कितनी फीस लेते हैं या उनकी योग्यता क्या है?
इसके अलावा क्लिनिक, पॉलीक्लिनिक, सैंपल कलेक्शन सेंटर और मॉर्च्युरी के लिए न्यूनतम मानक भी तय करने का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स के लिए नए ड्राफ्ट मानकों पर राज्यों, मेडिकल संस्थाओं और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।
प्रस्ताव में यह भी है कि क्लिनिकों में कुछ जरूरी इमरजेंसी दवाएं हमेशा रहें। इनमें हार्ट अटैक, एलर्जी, घबराहट, दौरे की दवाएं शामिल होंगी। नए नियमों के तहत, क्लिनिकों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी अनिवार्य की जा सकती है। जैसे परामर्श कक्ष का न्यूनतम आकार 70 वर्ग फुट रखा जा सकता है। रिसेप्शन और वेटिंग एरिया के लिए भी अलग जगह तय होगी। अगर कोई क्लिनिक मरीजों को कुछ घंटों के लिए भर्ती करता है, तो प्रति बेड कम से कम 65 वर्ग फुट जगह देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा साफ पानी, अच्छी रोशनी, वेटिलेशन का इतजाम और फिसलन-रहित फर्श जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी।