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वीडियो :पत्रकार वार्ता में भाषण दे रहे थे पप्पू यादव पत्रकारों ने टोका तो भड़क गए फिर टेबिल पर जाकर मांगी माफी

ग्वालियर 25 जून 2026/ देश की राजनीति में हाशिये पर जा चुके पूर्णिया के बाहुबली सांसद पप्पू यादव आज ने  ग्वालियर में पत्रकार वार्ता के बीच ही अपने बाहुबली होने का प्रमाण दे दिया हालांकि बाद में उन्हें अहसास हुआ कि कुछ गलत कर बैठे तो पत्रकारों को पोटने उनके साथ छोले भटूरे खाने जा बैठे और अपनी ओछी हरकत पर माफ़ी भी मांगी
ऊपर वीडियो में पत्रकारों पर बाहुबली अंदाज में भड़कते पप्पू यादव नीचे चित्र में उन्हीं पत्रकारों की टेबिल पर जाकर माफी मांगते 
हुआ कुछ यूं कि पप्पू यादव आज कांग्रेस द्वारा नीट पेपर मामले पर आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करने ग्वालियर आए थे इसी दौरान प्रेस वार्ता में उन्होंने कागजों का मोटा पोथन्ना खोल लम्बा चौड़ा भाषण देना शुरू कर दिया इसपर वरिष्ठ पत्रकार राजीव अग्रवाल ने उनसे मंचीय भाषण की जगह संक्षिप्त में बात रखने को कहा उनका कहना था कि जिन विषयों पर वे चर्चा कर रहे हैं, उन पर पहले भी कई नेता अपनी राय रख चुके हैं और प्रेस वार्ता जिस मुद्दे को लेकर बुलाई गई है, उसी पर जानकारी दी जाए।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को मंचीय भाषण में तब्दील न किया जाए। इतना सुनते ही पप्पू यादव का लहजा तल्ख हो गया। बाहुबली अंदाज में उन्होंने पत्रकारों से कहा, “आप तय मत करिए पप्पू यादव को… हम बहुत सारे पत्रकार देखे हैं।” इसके बाद कुछ देर के लिए प्रेस  का माहौल गरमा गया औरकॉन्फ्रेंस पत्रकारों ने भी नाराजगी जताई।
बाद में जब पप्पू यादव को लगा कि वे कुछ गलत कर बैठे हैं तो उनके तेवर ढीले पड़ गए और वे उन पत्रकारों के साथ छोले भटूरे खाने उनकी टेबिल जा बैठे तथा माफ़ी मांगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद और पत्रकारों के बीच हुई यह तीखी नोकझोंक अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
 कौन हैं पप्पू यादव
पप्पू यादव (राजेश रंजन) वर्तमान में किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं और वे बिहार के पूर्णिया से एक निर्दलीय लोकसभा सांसद हैं। हालांकि, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी ‘जन अधिकार पार्टी’ का कांग्रेस में विलय कर दिया था, लेकिन पूर्णिया से टिकट न मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्तमान में वह कांग्रेस के सहयोगी और उनके कार्यक्रमों में मुखर होकर शामिल होते रहते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से संसद में उनकी पहचान एक निर्दलीय सांसद के रूप में ही दर्ज है।
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