Homeप्रमुख खबरेंयूं ही भाजपा को नहीं कहा जाता 'पार्टी विथ डिफरेंस’

यूं ही भाजपा को नहीं कहा जाता ‘पार्टी विथ डिफरेंस’

प्रवीण दुबे

दतिया में भाजपा का बड़ा दांव: नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी पर भरोसा, संगठन को दिया स्पष्ट संदेश

दतिया 10 जुलाई 2026/मध्य प्रदेश की बहुचर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा फैसला लिया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देकर संगठन से लंबे समय से जुड़े आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है।इसकी घोषणा भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति ने शुक्रवार को जारी सूची में की।

यह निर्णय इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा पिछले कई दिनों से चुनावी तैयारियों में सक्रिय थे। उन्होंने जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया था, सार्वजनिक सभाएं की थीं और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। राजनीतिक गलियारों में लगभग तय माना जा रहा था कि भाजपा एक बार फिर उन्हीं पर दांव लगाएगी। लेकिन अंतिम क्षण में केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी तस्वीर बदल दी।
भाजपा ने जिन आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, उन्हें संगठन का समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता माना जाता है। वे लंबे समय तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं तथा मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता को टिकट मिलने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के इस फैसले से यह संदेश गया है कि पार्टी  अपने सिद्धातों  से समझौता नहीं करती केवल बड़े और चर्चित चेहरों के आधार पर यहां निर्णय नहीं होते  ऑल ओवर रिकॉर्ड भी बहुत महत्वपूर्ण होता है ऐसा लगता है पिछले विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा की हार का भी पार्टी ने विश्लेषण किया है। संगठन के प्रति निष्ठा, कार्यकर्ता संस्कृति और जमीनी पकड़ को भी प्राथमिकता दी गई है । यही कारण है कि भाजपा को अक्सर “पार्टी विद अ डिफरेंस” कहा जाता है।

दतिया उपचुनाव में भाजपा का यह निर्णय अब चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना सकता है। एक ओर संगठन से निकले नए चेहरे आशुतोष तिवारी होंगे तो दूसरी ओर विपक्ष इस फैसले को मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने संकेत दे दिया है कि चुनाव व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन और सामूहिक नेतृत्व के दम पर लड़ा जाएगा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या भाजपा का यह साहसिक दांव दतिया में चुनावी सफलता दिलाता है या विपक्ष इसे अपने पक्ष में भुनाने में सफल होता है। फिलहाल इतना तय है कि भाजपा के इस अप्रत्याशित निर्णय ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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