बेंगलुरु 3 सितंबर 2026/1999 के कारगिल युद्ध में शामिल रहे भारतीय सेना के एक रिटायर्ड जवान शिवानंद रेड्ड ने आत्महत्या की कोशिश की। उन्हें कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से मिलने से रोका गया था। वह काफी समय से दफ्तरों, नेताओं और मंत्रियों के चक्कर काट रहे थे। वह डीसीएम जी परमेश्वर से मिलकर जमीन के आवंटन के लिए गुहार लगाना चाहते थे। यह जमीन आवंटन 26 साल से ज्यादा समय से लंबित है। उन्होंने जहर खाने से पहले प्रशासन को एक भावुक खत भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा कि देश की सेवा करना उनकी गलती थी। शिवानंद कारगिल युद्ध में विकलांग भी हो गए थे। अभी उनकी हालत गंभीर है।
पुलिस ने जी परमेश्वर से मिलने से रोका
यह घटना कथित तौर पर 29 अगस्त को हुई, जब शिवानंद रेड्डी ने जी परमेश्वर से मिलने और सरकार द्वारा उन्हें वादा की गई जमीन दिलाने में उनकी मदद मांगने की कोशिश की। हालांकि, बताया जाता है कि सीनियर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें डिप्टी सीएम से मिलने से रोक दिया
शिवानंद रेड्डी को उनकी सेवा के सम्मान में कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के चिंतामणि में जमीन देने का वादा किया गया था। हालांकि, यह सिर्फ वादा ही रहा। उन्हें जमीन का आवंटन कभी नहीं हुआ। यह युद्ध के अनुभवी जवान दो दशकों से ज्यादा समय से इस जमीन का इंतजार कर रहे थे।