भारतीय संस्कृति, विविधता और विश्वबंधुत्व के अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में 1500 से अधिक लोगों की सहभागिता
म्यूनिख/ग्वालियर 1 अक्टूबर 2026/भारतीय संस्कृति की विविधता, एकता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को विश्व पटल पर पहुंचाने के उद्देश्य से उदभव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान, ग्वालियर एवं सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा जर्मनी के म्यूनिख में विश्व समभाव दिवस के अवसर पर ‘ *एक भारत–एक विश्व* ’ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं शांति महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को जर्मनी स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से आयोजित किया गया।
उदभव के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय एवं दीपक तोमर ने बताया कि महोत्सव में *स्पेन, क्यूबा, कंबोडिया, हंगरी, ब्राजील, बुल्गारिया, जर्मनी सहित विभिन्न देशों से आए 1500* से अधिक लोगों ने सहभागिता की। आयोजन में भारतीय संस्कृति के साथ विभिन्न देशों की सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में म्यूनिख स्थित भारत के *महावाणिज्य दूत शत्रुघ्न सिन्हा, रबात नकर, महमुत तुर्कर, जॉर्ग वान हूवेन,* म्यूनिख-बोगेनहाउजेन डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के सदस्य अमित गर्ग, सतयुग दर्शन ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि तथा उदभव के यूरोपियन हेड *आदित्य सिंह तोमर* एवं ऑपरेशनल डायरेक्टर *अक्षत तोमर* सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
महोत्सव का विशेष आकर्षण उद्भव की तकनीकी प्रमुख एवं सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना सुश्री वाणी माधव की मनोहारी प्रस्तुति रही। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और सौंदर्य ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
इसके साथ ही म्यूनिख स्थित भवानी ओडिसी डांस स्कूल की जर्मन ओडिसी कलाकार नायला एवं वासेलिना ने भी अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की वैश्विक लोकप्रियता को प्रदर्शित किया।
‘एक भारत–एक विश्व’ महोत्सव में नृत्य, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अंतर-सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से विभिन्न देशों के लोगों को एक मंच पर लाया गया। भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंगों के साथ विदेशी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों के साथ अन्य देशों के खान-पान की विविधता भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। इसने सांस्कृतिक संवाद को एक नया आयाम दिया।
उद्भव के ऑपरेशनल हेड अक्षत तोमर एवं यूरोपियन हेड आदित्य सिंह तोमर ने कहा कि जब विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं के माध्यम से एक-दूसरे को समझते हैं, तो भौगोलिक एवं सांस्कृतिक दूरियां कम होती हैं। ऐसे आयोजन आपसी संवाद, सम्मान और शांति के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘एक भारत–एक विश्व’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के माध्यम से विश्व को जोड़ने की एक व्यापक सोच है। भारत की सांस्कृतिक विरासत में पूरी मानवता को एक परिवार के रूप में देखने की भावना निहित है और उद्भव इसी संदेश को विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
*ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े सुवेंदु रथ एवं चिदानंद पाणिग्रही* ने भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने से जुड़े विचार-विमर्श में सहभागिता की।
उदभव के सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह, मनोज अग्रवाल, प्रवीण शर्मा, शरद सारस्वत, आलोक द्विवेदी, राजीव शुक्ला, मूलचंद्र रसेनिया, सुरेश वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने म्यूनिख में आयोजित सफल अंतरराष्ट्रीय आयोजन को उद्भव की वैश्विक सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से शांति एवं सद्भाव का संदेश देने के लिए आने वाले वर्षों में भारत के बाहर भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को विस्तार दिया जाएगा।
मुख्य संदेश
*“एक भारत–एक विश्व : भारतीय संस्कृति से विश्व शांति और मानव एकता की ओर* ।”