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लश्कर पूर्व : सतीश के सामने अपनों की चुनौती, मुन्नालाल पर धरतीपकड़ की छाप

प्रवीण दुबे

 

ग्वालियर के लश्कर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में एकबार पुनः भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। यहां से किसकी हार होगी और किसकी जीत इसबारे में कुछ भी कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी बावजूद इसके अभी जो भी राजनीतिक परिदृश्य दिखाई दे रहा है उसे देखकर दोनों प्रतिद्वंद्वी के बारे में कुछ अवस्य लिखा जा सकता है।

भाजपा की बात करें तो  यहां उसके प्रत्याशी को फिलहाल विरोधी पार्टी से कम अपनों से ज्यादा चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। सर्वविदित है कि चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन से पूर्व इस विधानसभा में किस प्रकार के हालात निर्मित थे। एक तरफ सिटिंग विधायक के नाते मायासिंह दौड़ में थी दूसरी ओर अपने राजनीतिक जीवन की सेवानिवृति के मुहाने पर खड़े जयसिंह कुशवाह भी टिकिट की पुरजोर मांग कर रहे थे,इतना ही नहीं  संगठन के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी भी अपने पुत्र के लिए प्रयासरत थे।पार्टी ने इन सभी वजनदार लोगों को दरकिनार करके सतीश सिकरवार पर भरोसा किया । 

सूत्र बताते हैं कि ये सभी वजनदार नेता फिलहाल पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत से जुटे दिखाई नहीं दे रहे,ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं इन लोगों के मन में उन्हे टिकट न दिए जाने को लेकर नाराजगी है।

इतना ही नहीं भाजपा की अंदरूनी राजनीति में थोड़ी सी रुचि रखने वाला व्यक्ति भी यह जानता है कि वर्तमान में मध्यप्रदेश की भाजपा में सर्वाधिक दबदबा रखने वाले नेता जो कि ग्वालियर से ही आते हैं उनसे भी लश्कर पूर्व प्रत्याशी के बहुत अच्छे राजनीतिक सम्बन्ध न होना भी उनके लिए परेशानी का कारण बनता दिख रहा है।

श्री सिकरवार के सामने एक बड़ी समस्या लश्कर पूर्व विधानसभा के अंतर्गत आने वाला मुरार का क्षेत्र है । उल्लेखनीय है कि श्री सिकरवार अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से लेकर वर्तमान तक लश्कर क्षेत्र में ही ज्यादा सक्रिय रहे हैं  यही वजह है कि लश्कर की तुलना में मुरार उनके लिए थोड़ा कठिन इलाका कहा जा सकता है।

इन सबके अलावा श्री सिकरवार के सामने उनके प्रतिद्वंद्वी और उनके समर्थकों द्वारा  व्यक्तिगत कुप्रचार का मोर्चा भी बड़े पैमाने पर खोल दिया गया है। इसबारे में सही बात जनता जनार्दन तक पहुंचे और वह भृमित न हो इसके लिए श्री सिकरवार को व्यापक रणनीति बनानी होगी जिसमें की फिलहाल कमी नजर आ रही है।

उधर दूसरी और इस विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी के बारे में चर्चा करें तो क्षेत्रीय नागरिक उन्हें धरतीपकड़ की संज्ञा देते देखे जा सकते हैं। धरतीपकड़ अर्थात ग्वालियर का वह शख्स जो कि पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक सब चुनाव लड़े पर जीते एक भी नहीं। मुन्नालाल गोयल का राजनीतिक इतिहास इस बात का गवाह है कि वे अब तक पार्षद ,महापौर से लेकर विधानसभा तक का चुनाव कई बार लड़े पर हरबार हारे। लोग यहां तक कहते देखे जा सकते हैं कि चुनाव लड़ना तो मुन्नालाल का शौक़ है वे इसी लिए लड़ते हैं ,जीतने के लिये नहीं।

मुन्नालाल के सामने दूसरा सबसे बड़ा माइनस पोइंट है उनकी ढलती उम्र जबकि उनकी तुलना में सतीश सिकरवार युवा है। ऐसी स्थिति में युवा मतदाता उनसे दूर जाने की सम्भावना बन गई है। मुन्नालाल के सामने लश्कर क्षेत्र में उनका कम जनाधार बहुत बड़ी समस्या कही जा सकती है।

इन सबके अलावा मुन्नालाल के लिए लश्कर पूर्व का राजनीतिक इतिहास भी उनकी नींद उड़ा देने वाला      1977 के बाद से अब तक हो चुके 10 विधानसभा चुनावों में यहां केवल 2 बार ही कांग्रेस अपने पांव जमा सकी है। 8 बार (एक बार जनता पार्टी के बैनर तले) भाजपा का ही परचम ही लहराया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह कि ग्वालियर पूर्व एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां जातिगत समीकरण ज्यादा मायने नहीं रखते। नौकरी पेशा और भाजपा के परंपरागत वोट बैंक क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य व ओबीसी वर्ग की जनसंख्या यहां सबसे अधिक है

क्षेत्र की बड़ी समस्याएं

संभागीय मुख्यालय और स्मार्ट सिटी क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी इस विधानसभा के नए विकसित क्षेत्रों में सड़क, सीवर की समस्याएं हैं। तिघरा बांध का पानी यहां नहीं पहुंचता। पूरा फोकस केवल मुख्य मार्गों पर ही रहता है। कॉलोनियों, छोटी बस्तियों की सड़कें बदहाल हैं। अवैध कॉलोनी भी यहीं ज्यादा विकसित हुईं हैं।

बड़े वादों की स्थिति

चुनाव के समय माया सिंह ने शहर के नवविकसित क्षेत्र दीनदयाल नगर व आसपास की वैध, अवैध कॉलोनियों में सड़क, सीवर व पानी को लेकर कई बार वादे किए। काम भी किया, कॉलोनियों के वैध होने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी है। बावजूद इसके नया विकसित क्षेत्र इतना बड़ा और काम इतने अधिक बकाया हैं कि व्यवस्थाएं होने में अभी समय लगेगा। लश्कर क्षेत्र में नौकरी पेशा और व्यापार-व्यवसाय में जुटे लोगों को समय पर पानी न मिलने की दिक्कत कायम है।

जातीय समीकरण

मूल रूप से यह क्षेत्र अधिकारी-कर्मचारी वर्ग बाहुल्य है, जो जातीय समीकरणों पर कम विश्वास करता है। बावजूद इसके जातीय रूप में यहां क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, एससी-एसटी, यादव, गुर्जर, कुशवाह की संख्या मायने रखती है।

 

क्षेत्र क्र. 16 ग्वालियर पूर्व

कुल मतदाता : 304084

मतदान केंद्र : 336

पुरुष मतदाता : 164349

महिला मतदाता : 139722

फैक्ट फाइल

 

2013 चुनाव परिणाम

 

माया सिंह (भाजपा) – 59824

मुन्नालाल गोयल (कांग्रेस) – 58677

आनंद शर्मा (बीएसपी) – 17711

 

पिछले 2 चुनावों की स्थिति

 

पार्टी 2008 2003

भाजपा 40.38 56.87

कांग्रेस 38.71 40.28

बसपा 16.29 0.99

 

 

 

 

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