कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भले ही राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया है,लेकिन राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्यौता देने से फिलहाल यह कहकर इंकार कर दिया है कि पहले अपना नेता चुनकर लाओ। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के लिए जीत के बाद नेता चुनना सबसे कठिन काम है क्यों कि इस दौड़ में कमलनाथ के अलावा ज्योतिरादित्य शामिल हैं। गौरतलब है कि
कमलनाथ के समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर चुके हैं, वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। कई कांग्रेस विधायक अपनी सीट छोड़ने के लिए भी तैयार हैं| कांग्रेस के पास इन दो चेहरों के साथ ही दिग्विजय सिंह भी इस दौड़ में शामिल हैं। हालांकि वह पहले इससे इंकार कर चुके हैं| पूरे चुनाव में सिंधिया और कमलनाथ ही दमदार दावेदार रहे हैं, इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के समय भी दोनों ही नेता के नाम चर्चा में थे और कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया| अब एक बार फिर दोनों आमने सामने हैं| कमलनाथ अनुभवी तो सिंधिया ऊर्जावान नेता हैं और युवाओं का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। शाही परिवार से होने के चलते उनका एक ग्लैमर भी है, हालाँकि बीजेपी इसी को मुद्दा बनाकर उन्हें घेरती आई है|