बुद्धिविनायक के स्वागत को आतुर हैं देशवासी चौतरफा गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की ज़ोरदार तैयारी
पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम प्रारंभ हो गई है महाराष्ट्र मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश सहित देश के तमाम राज्यों में स्थापना हेतु गणेश प्रतिमाएं सजधज कर तैयार हो गई हैं। ग्वालियर चम्बल अंचल की बात करें तो यहां ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में गणेश स्थापना की गौरवशाली व पुरानी परंपरा है । अंचल ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश के सबसे भव्य व विशाल गणेश उत्सव में से एक श्री अचलेश्वर न्यास गणेश पंडाल में इस वर्ष भी विराट व भव्य गणेश प्रतिमा स्थापना की सभी तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं। शहर में सैकड़ों की संख्या में गणेश पंडाल लगाए जाते हैं। उधर गणेश उत्सव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने चोकसी बढ़ाकर दिशा निर्देश जारी किए हैं।
कोई भी पूजा श्री गणेश उपासना से ही प्रारम्भ होती है और जब बात गणेश उत्सव की हो तो भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। इस दौरान गणपति को स्थापित करने और फिर उनको विसर्जित करने की प्रथा है। गणपति उत्सव के दौरान पांडाल या मंदिर में तो भगवान गणेश की खूब अच्छी और ऊंची प्रतिमाएं सजाई ही जाती हैं, इसी के साथ घर में भी गणेश प्रतिमा लाकर उनका स्वागत किया जाता है।
घर में भी गणपति स्थापना पूरी विधि के साथ होनी चाहिए। इस दौरान अगर नियमों का पालन नहीं होगा तो गणेश जी रुष्ट भी हो सकते हैं। घर में लाई जाने वाली गणेश मूर्तियां विभिन्न आकार की आती हैं और अलग-अलग मटीरियल से बनी होती हैं। हालांकि अब पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के या फिर इको-फ्रेंडली गणेशा भी खूब चलन में हैं। वहीं सुपारी से भी गणेश प्रतिमा बनाई जा सकती है।
कैसे करें घर पर गणपति को स्थापित
ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक प्रातः तल और घर को साफ करें। गंगा जल से पवित्र करें। अब मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को विधिवत आसान दें। लाल कपड़ा या केले के पत्ते का ही आसन दें। घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा रखकर कलश स्थापना करें। गणेश जी को नई पीली धोती, जनेऊ, आभूषण, माला इत्यादि धारण कराएं। दूर्वा, पान, सुपारी, इत्र, दुग्ध, दही, शहद, रोली, सिन्दूर, पुष्प इत्यादि उनको विधिवत पूजन के बाद अर्पित करें।