राष्ट्रोत्थान न्यास ग्वालियर की ज्ञानप्रबोधनी व्याख्यान माला के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेशजी ने हिंदुत्व में समरस मुस्लिम समाज विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ मुसलमान या एक अच्छे हिन्दू की पहचान उसके आचरण से होती है चिंन्ह से नहीं चिन्ह तो कट्टरता पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल चिन्हों से इंसान बनाने की जो कोशिश हो रही है वह गलत है इससे असहिष्णुता रूपी इंसान का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सदैव से सुधारवाद का समर्थक रहा है जब विकार जाता है,नष्ट होता है तभी सुधार आता है। उन्होंने कहा की जो जन्म लेता है उसका अंत भी सुनिश्चित है इस दृष्टि से पाकिस्तान बंगलादेश के जन्म की समय और तारीख हम सबको पता है उनकी जन्म कुंडली से यह सब कुछ देखा जा सकता जहाँ तक भारत का सवाल है वह एक प्राचीन राष्ट्र है यही वजह है कि वह युगों से कायम है और आगे भी रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत वेज्ञानिको से नहीं सन्तों से संचालित था इस कारण वह विश्व गुरु कहलाया यहां भरष्टाचार नहीं परमार्थ का भाव था इसी लिए यह सोने की चिड़िया कहलाया
इससे पूर्व व्याख्यान माला की शूरूवात में राष्ट्रोत्थान न्यास के प्रोफेसर राजेन्द्र बांदिल तथा मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नियाज मोहम्मद ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
व्याख्यान माला के तीसरे दिन गरुगोविंद सिंह और सिख परम्परा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अरुणजी जैन का व्याख्यान होगा