ये पहले कभी नहीं हुआ था , न्यायपालिका सदा स्वतंत्र थी भारत में और इस पर कोई भी आरोप या प्रत्यारोप नहीं लगता था लेकिन अचानक ही ऐसे हालात सामने आने लगे जो पहले कभी नहीं हुए थे . जजों पर बनाया जाने लगा भारी दबाव . हद तो तब हुयी जब जजों ने पहली बार प्रेस कान्फ्रेस कर डाली और अपने ही सीनियर पर आरोप लगा डाला . लेकिन अब जो हुआ वो हैरान कर देने वाला है .
ज्ञात हो कि स्वामी असीमानंद जी के मामले में अपना फैसला सुना कर जज रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है . फिलहाल अभी तक उनके इस्तीफे के कोई ठोस कारण उन्होंने नही बताये हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के प्रवक्ता और विचारक श्री राकेश सिन्हा जी का कहना है कि जज साहब ने अपना इस्तीफा असीमानंद जी को बरी किये जाने के बाद लग रहे तमाम आरोपों के चलते दे दिया है जिसके बाद बड़ी बहस छिड़ गयी है .
असीमानंद जी को केस में सबूतों के अभाव में बरी किया गया है लेकिन मज़हबी कट्टरपंथियों ने न्यायपालिका पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए . इस से पहले भी SC ST एक्ट के खिलाफ भी ऐसे ही विवाद किया गया था सडको पर उतर कर जब न्यायपालिका के निर्णय को कुछ कट्टरपन्थियो ने हवा दी और देश विवादों से त्रस्त हुआ था . एक बार फिर से असीमानंद जी के बरी होते ही जिस प्रकार से कट्टरपंथियों ने न्यायपालिका पर सोशल मीडिया आदि में कीचड़ उछला था वो हैरान कर देने वाला रहा .. ये वही कट्टरपंथी थे जिन्होंने 7 साल तक जमानत ख़ारिज होने के बाद इसी न्यायपालिका की जम कर तारीफ की
