प्रवीण दुबे
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह क्या अपनी अनदेखी से नाराज हैं या फिर राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में उनसे बोलने को मना कर दिया है ? पहले जन आक्रोश रैली के पोस्टर से अपनी फोटो लगाने से इंकार करने और अब मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की पहली सभा में सार्वजनिक रूप भाषण देने से इंकार कर देने के बाद अब यह सवाल जोर शोर से उठने लगा है। उल्लेखनीय है कि राहुल की बहन प्रियंका गांधी के ग्वालियर दौरे के समय भी दिग्गी राजा दिखाई नहीं दिए थे।
मप्र विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मालवांचल के छोटे से कस्बे पोलायकलां मे सभा को संबोधित किया था।
राहुल गांधी की सभा में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मंच संचालन कर रहे विधायक कुणाल चौधरी ने भाषण देने के लिए आमंत्रित किया। दिग्विजय ने भाषण देने से मना कर दिया। यह देख वहां उपस्थित कांग्रेसी सन्न रह गए हाल ही में जारी जन आक्रोश यात्रा के पोस्टर, बैनर में भी दिग्गी ने अपनी फोटो लगाने से इनकार कर दिया था । अब राहुल गांधी की पहली सभा में भाषण से इनकार करके दिग्गी ने बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है?
कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच राजनीतिक रिश्ते कैसे रहे हैं यह किसी से छुपा नहीं है। इसी गुटबाजी के चलते जहां मध्यप्रदेश में कांग्रेस लगातार हारती रही वहीं पहले स्व माधवराव सिंधिया और उनके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वच्छ छवि के नेता होने के बावजूद मध्यप्रदेश में पनपने नहीं दिए गए अंततः ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी।
साफ है मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। यह भी साफ है कि दिग्विजय सिंह इस लड़ाई के मुख्य पुरोधा माने जाते रहे उन्हे गांधी परिवार से भी सदैव तवज्जो मिलती रही । यही वजह रही दिग्विजय सिंह बेलगाम हो गए और उनके बयानों और क्रियाकलापों ने मध्यप्रदेश ही नहीं पूरे देश से कांग्रेस को बड़ा झटका दिया।
वर्तमान विधानसभा चुनाव से पूर्व दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में अपनी प्रस्तुति चाहते थे जिसे पार्टी हाईकमान ने स्वीकार नहीं किया और कमलनाथ को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद हारकर दिग्विजय सिंह ने जो है वही सही की रणनीति पर काम करना शुरू किया लेकिन समय समय पर अपने समर्थकों को यह संकेत भी दिया कि हाईकमान के निर्णय से वे प्रसन्न नहीं हैं।
ग्वालियर में प्रियंका गांधी के दौरे के समय दिग्गीराज़ा कहीं दिखाई नहीं दिए, जनाक्रोश रैली के पोस्टर से नाम व फोटो लगाने से मना करने के बाद अब राहुल की सभा में बोलने से इंकार करने जैसे कई कृत्यों को उन्होंने अंजाम दिया है। इसके अलावा मंचों पर कार्यकर्ताओं के बीच भी वे अपना आपा खोते दिखाई दिए हैं। भले ही कांग्रेस दिग्गी राजा की नाराजी को छुपाने के लिए यह प्रचारित करे कि दिग्विजय सिंह पब्लिक मीटिंग के बजाए कांग्रेस के कैडर मैनेजमेंट का काम कर रहे हैं। फ्रंटलाइन में दिखने के बजाए दिग्गी अंदरूनी तौर पर कांग्रेस की वापसी की कवायद में लगे हैं। लेकिन राहुल जैसे सबसे बड़े नेता की सभा में संचालनकर्ता द्वारा बोलने के लिए नाम पुकारे जाने पर सार्वजनिक रूप से इंकार करने और प्रियंका गांधी के दौर से दूरी बनाकर दिग्विजय ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे संतुष्ट नहीं हैं।