कृषि कानूनों पर किसानों और सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला थम गया लगता है। आज 12वें दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अगली मीटिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई। वैसे तो बैठक पांच घंटे तक चली पर मंत्रियों और किसानों में आमने-सामने बात 30 मिनट भी नहीं हो पाई। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार ने हमें अपने प्रस्तावों पर विचार करने के लिए कहा है। वह अब बातचीत का सिलसिला बंद कर रही है। यही बात कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी कही।
मीटिंग में सरकार और किसानों के बीच तल्खी का अंदाजा मजदूर संघर्ष कमेटी के एसएस पंढेर के बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘कृषि मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतजार कराया। यह हमारा अपमान है। इसके बाद जब वे आए तो बोले कि सरकार की बात मान लीजिए। अब हम मीटिंग करना बंद कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।’
तोमर के बयान से लगा- आगे बातचीत के आसार नहीं
मीटिंग के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बोले, ‘हमने 12 राउंड की बैठकें कीं। जब यूनियन कानून वापसी पर अड़ी रही तो हमने उन्हें कई विकल्प दिए। आज भी हमने उन्हें कहा है कि सभी विकल्पों पर चर्चा करके आप अपना फैसला हमें कल बताइए।’
तोमर ने कहा, ‘इतने दौर की बातचीत के बाद भी नतीजा नहीं निकला, इसका हमें खेद है। फैसला न हो सकने का मतलब है कि कोई न कोई ताकत है, जो इस आंदोलन को बनाए रखना चाहती है और अपने हित के लिए किसानों का इस्तेमाल करना चाहती है। ऐसे में किसानों की मांगों पर फैसला नहीं हो पाएगा।