यह भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मुगल सल्तनत को समाप्त हुए सैकड़ों सालों के बावजूद भारत को लूटने वाले मुगल आक्रताओं के प्रति आस्था रखने वालों की कमी नहीं है यही वजह है कि मुगल लुटेरे बाबर के नाम पर हिन्दुओं को नीचा दिखाने भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिर तोड़कर खड़े किए बाबरी ढांचे को कारसेवकों द्वारा गिराए जाने के 33 वर्ष बाद भी बाबर के मानस पुत्र हुमायूं कबीर जैसे लोग उस लुटेरे के नाम पर मस्जिद निर्माण करना चाहते हैं।
अफसोस इस बात का है कि गजनी गौरी ओरंगजेब बाबर जैसे लुटेरों को अपना अब्बा मानने वाले हुमायूं जैसे मुसलमान ने बाबरी कलंक की पुर्नस्थापना के लिए देश का माहौल खराब करने उसी 6 दिसम्बर का दिन चुना है जब कारसेवकों ने वर्षों वर्ष बाबरी ढांचे के भीतर विराजित रामलला को वहां से मुक्त करके भव्य मंदिर निर्माण का शंखनाद किया था,वहां अब रामलला का दिव्य भव्य मंदिर बन चुका है।
बंगाल के मुस्लिम नेता हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के भरतपुर सीट से विधायक हैं. वह पिछले कई दिनों से दावा कर रहे हैं कि 6 दिसंबर को वो भरतपुर के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवाने के लिए नींव रखने जा रहे हैं। इसको लेकर पिछले कई दिन से यहां तनाव है।
खबर लिखे जाने तक जैसी की जानकारी मिल रही है कबीर ने लुटेरी मुगलिया मानसिकता के समर्थक लाखों मुसलमानो को वहां एकत्रित किया हुआ है इतना ही नहीं बाबरी मस्जिद निर्माण से पूर्व यहां कलमा पढ़ने अरबी मौलवी मौलानाओ को भी यहां बुलाया है,शर्मनाक बात यह है कि देश में तनाव पैदा करने के लिए लगाए गए इस उन्मादी मजमें के लिए उन्हें अनुमति नहीं दी गई है लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि बंगाल सरकार की मुस्लिम परस्त मानसिकता वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मूक दर्शक बनकर इस आग लगाऊ आयोजन को अपना मौन समर्थन देती दिखाई दे रही हैं।
हुमायूं कबीर की मानसिकता किस कदर हिन्दू विरोधी है इसका प्रमाण मई 2024 में उनके द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरानबंगाल में दिए एक बयान से मिलता है इसमें उन्होंने कहा था कि ‘मुर्शिदाबाद में 70% जनसंख्या मुस्लिम है… बीजेपी के समर्थकों को भागीरथी नदी में फेंक देंगे.’
उन्होंने आरएसएस पर भी भड़काऊ बयान देते हुए कहा था कि, “साल 2011 में बंगाल में आरएसएस की करीब 400 शाखाएं थीं. आज वह संख्या 12 हज़ार तक पहुंच गई है।
मुगल लुटेरे के प्रति श्रद्धा,मुस्लिमों की आबादी 70 प्रतिशत होने की धमकी,आरएसएस की शाखाएं 4 हजार से 12 हजार होने पर अफसोस व्यक्त करना साफ तौर पर यह साबित करता है कि हुमायूं जैसे मुसलमान क्या चाहते हैं। 6 दिसंबर जैसे संवेदनशील दिनपर वह मस्जिद की आड़ में बाबरी मानसिकता के पुर्नस्थापना का प्रयास करके देश में आग लगाना चाहते हैं इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।