आज सुबह जहां एक ओर पूर्ण स्वदेशी तकनीक से निर्मित लडाकू लाइट कम्बैट एयरक्रॉफ्ट (एलसीए) तेजस में बीस हजार फुट की ऊंचाई पर ईंधन भरने का इतिहास भारत द्वारा रचा जा रहा था उसी दौरान ग्वालियर से इसपर पैनी नजर रखी जा रही थी। एचएएल एवं एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के डिजायनर्स ने ग्वालियर ग्राउंड स्टेशन से इस पूरी प्रक्रिया पर करीबी से नजर रखी।
इस लड़ाकू विमान का उत्पादन करने वाले हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने एक बयान में कहा, ‘तेजस में ईंधन भरने का काम 20, 000 फुट की ऊंचाई पर किया गया। इस दौरान लड़ाकू विमान की रफ्तार 270 नॉट्स थी। विमान के सभी आंतरिक टैंक्स एवं ड्राप टैंक्स को ईंधन से भरा गया।’
नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर के विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह ने इस तेजस विमान को उड़ाया। लड़ाकू विमान में ईंधन भरने का काम सुबह 9.30 बजे किया गया। इस दौरान एचएएल एवं एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के डिजायनर्स ने ग्वालियर ग्राउंड स्टेशन से इस पूरी प्रक्रिया पर करीबी से नजर रखी।
इस सफलता के बाद भारत लड़ाकू विमानों के लिए एयर टू एयर प्रणाली विकसित कर चुके चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। बयान में कहा गया है कि लड़ाकू विमान का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप रहा।