दुर्गा पूजा के अंतिम नवरात्री दिन नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना होती है| जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है ये देवी सभी अभीष्ट वस्तुओं को देने वाली एवं सारी सिद्धियों की प्राप्ति करने वाली हैं | इनकी साधना से आपके लिए कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता एवं अमृत पद मिलता है |
देवी के इसी रूप की आराधना से भगवान शंकर ने भी समस्त सिद्धियाँ प्राप्त करी थीं और इन्ही के कारण उनका अर्धनारीश्वर रूप प्रकट हुआ | ये कमल पे आसीन रहती हैं एवं विधि-विधान से पूजी जाने पर सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं | इन्ही देवी की पूजा के साथ शास्त्रों के अनुसार नव दुर्गा का विसर्जन किया जाता है एवं घर और जीवन की मंगल कामना की जाती है | इनकी पूजा इस मंत्र से करें –
“या देवी सर्वभूतेषु, लक्ष्मीरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः ||”