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सोमनाथ से प्रधानमंत्री की शौर्य हुंकार : आज भी मौजूद हैं सोमनाथ के जीर्णोद्धार का विरोध करने वाली ताकतें

गजनी-औरंगजेब जैसे मुगल लुटेरों आक्रांन्ताओं द्वारा सोमनाथ मंदिर पर तमाम हमलों के बावजूद सीना ताने खड़े सोमनाथ मंदिर के 1000 साल पूरे होने पर देश स्वाभिमान पर्व के तौर पर मना रहा है. पीएम मोदी खुद सोमनाथ पर मौजूद हैं. दो दिन से जारी उनकी पूजा अर्चना के के बाद उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के रेनोवेशन का वादा किया, तो उन्हें ऐसा करने से रोका गया. 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ दौरे पर भी आपत्तियां उठाई गईं. दुर्भाग्य से, आज भी, सोमनाथ मंदिर के रीडेवलपमेंट का विरोध करने वाली ताकतें मौजूद और एक्टिव हैं. तलवारों की जगह भारत के खिलाफ छिपी हुई साजिशों ने ले ली है. हमें उनके बारे में ज्यादा जागरूक रहने की ज़रूरत है. हमें खुद को मज़बूत करना होगा और एकजुट रहना होगा. हमें हर उस ताकत को हराना होगा जो हमें बांटने की कोशिश करती है. पिछले 1000 सालों का सफर हमें अगले 1000 सालों के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देगा.”,

‘सोमनाथ मंदिर की लूट सिर्फ खजाने की लूट नहीं थी’

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से, आजादी के बाद, औपनिवेशिक सोच वाले लोगों ने हमारे शानदार अतीत से छुटकारा पाने की कोशिश की. उन्होंने इतिहास को मिटाने की पूरी कोशिश की. सोमनाथ मंदिर के लिए लड़ने वालों को उनका सही सम्मान और महत्व नहीं दिया गया. कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं ने तो इन हमलावरों के इतिहास पर पर्दा डालने की भी कोशिश की. धार्मिक हमले को लूट का नाम दिया गया. हमें हमारी किताबों में पढ़ाया गया है कि सोमनाथ मंदिर को उसके खजाने को लूटने के लिए तोड़ा गया था. नफरत, अत्याचार और आतंक का क्रूर इतिहास हमसे छिपाया गया.”

सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं

पीएम मोदी ने कहा, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है, यह विजय और पुनर्निमाण का है. हमारे पूर्वजों के पराक्रम का है, हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान का है. आक्रांता आते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ पुन: स्थापित होता रहा, इतनी सदियों का संघर्ष, इतना महान धैर्य, सृजन और पुनर्निमाण का यह जीवट, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है.”

उन्होंने कहा, “1000 साल पहले, हमलावरों को लग रहा था कि उन्होंने यह जमीन जीत ली है, लेकिन आज, 1000 साल बाद भी, सोमनाथ मंदिर के ऊपर लगा ‘ध्वज’ पूरी दुनिया को भारत की ताकत और काबिलियत के बारे में बता रहा है.”

संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं, उन सबको मेरी तरफ से जय सोमनाथ. ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है, ये उत्सव अद्भुत है. एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की ये गूंज, आस्था का ये उफान और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के भक्तों की उपस्थिति… इस अवसर को भव्य और दिव्य बना रही है.” उन्होंने कहा, “यह समय, यह माहौल और यह अवसर दिव्य है… मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर इस अवसर की सेवा करने का मौका मिला.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह हमारे लिए गर्व का क्षण है, यह पूरे देश के लिए गर्व का समय है. यह दिव्य और भव्य अवसर है. हम सबको महादेव का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है. आज से ठीक एक हजार साल पहले, जहां हमलोग बैठे हैं, उस समय के बारे में आप सोचिए, क्या माहौल रहा होगा, जब हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगा दी थी, अपनी आस्था, विश्वास और महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था. उन्होंने कहा, “आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में प्रश्न आ रहा है कि ठीक 1000 वर्ष पहले, ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा? अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने महादेव के लिए हमारे पुरखों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. 1000 साल पहले वह आक्रंता सोच रहे थे कि हमें जीत लिया कि आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है. यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है.”

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