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आपदाकाल में काम आया संघ का समरसता मंत्र सभी समाजों ने आगे आकर सबके लिए खोल दिये अपने श्मशान

संघ के आहवान पर आपदा में एक हो गए श्मशान ,कोरोना संकट के समय में श्मशानों से भी मजबूत होगा सामाजिक समरसता का संदेश

ग्वालियर। कोरोना आपदा के समय जब समूचा देश लोगों के जीवन की रक्षा के लिए इस क्रूर वायरस से चुनौतीपूर्ण युद्ध का सामना कर रहा है ऐसे कठिन समय मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फिर एक बार सामाजिक समरसता के संदेश को लेकर समाज के बीच गया और समाज ने भी इस संदेश को न केवल स्वीकार किया अपितु स्वागत भी किया।परिणाम दुर्भाग्यपूर्ण क्षणों में ही सही ग्वालियर के मुक्ति धाम के दरवाजे सभी समाजो के लिए खुल गए।उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में प्रत्येक समाज के अलग अलह मुक्तिधाम हैं जो कहीं न कहीं समरसता में अवरोध थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यूँ भी विगत लंबे समय से देश भर में मंदिर एक एक कुआं ओर एक श्मशान का निरंतर आहवान कर ही रहा है वो ग्वालियर महानगर में साकार हो रहा है। आपदा की इस घड़ी मेें ग्वालियर महानगर के विभिन्न समाजों ने अपने अपने श्मशान समान भााव से सबके लिए खोल लिए हैं। इस दृश्य ने संकटकाल में हमारा समाज एक परिवार की भावना का जन जन में प्रस्फुटन किया है।
ग्वालियर में कोरोना महामारी के दौरान कोरोनाग्रस्त मृतकों का अंतिम संस्कार लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकाॅल के तहत किया जा रहा है। ऐसे में ये दुविधा खड़ी हुई कि बिना कोरोना वाले मृतकों के दाह संस्कार के लिए कई घंटे लगने लगे। सेवा कार्य में जुटे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों के संज्ञान में आयी तो अन्य सेवा कार्योें की तरह इस विषय पर भी प्रान्त एवं विभाग के अधिकारियों में संवाद अविलंब संवाद शुरु हो गया। सबके लिए श्मशान खोलने के लिए ग्वालियर के विभाग संघ चालक विजय गुप्ता ने महाराष्ट्रीय समाज के अध्यक्ष निधिकांत मोघे, सचिव संजय लघाटे से बात की तो वे सहर्ष होकर बोले कि हमारे श्मशान में सभी समाज के लिए ये व्यवस्था हम काफी पहले से शुरु कर चुके हैं और अब इस आव्हान के बाद और सौभाग्य होगा ही इस आपदा में। आप बताइए जहां जरुरत होगी वहां हम दाह संस्कार का खर्चा भी उठाएंगे। दिगंबर जैन मुक्तिधाम के अध्यक्ष डाॅ. वीरेन्द्र गंगवाल और निर्मल पाटनी ने भी सभी के लिए मुक्तिधाम के द्वार खोल लिए। मराठा समाज श्मशान के लिए मराठा श्मशान कल्याण समिति के अध्यक्ष समाजसेवी बालखाण्डे ने जिम्मा संभाला। माहेश्वरी समाज मुक्तिधाम के लिए मोहन माहेश्वरी और गोविन्द पसारी ने समाज के बीच जब यह प्रस्ताव रखा तो आगे बढ़कर सहयोग आया। लक्ष्मीगंज क्षेत्र में इन चार श्मशानों को जब कोरोना काल में सामाजिक समरसता के भाव से सबके लिए खोल दिया गया तो ऐसा ही एक संवाद गुढ़ी गुढ़ा का नाका पर राजपूत समाज के श्मशान के लिए हुआ। संघ के स्वयंसेवक डाॅ. कमल भदौरिया ने हमारे प्रस्ताव पर अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय राजपूत संघ के जिलाध्यक्ष बी पी सिंह तोमर, अतर सिंह तोमर, कैप्टन ब्रजेन्द्र सिंह तोमर, एडवोकेट राजवीर सिंह भदौरिया, भूपेन्द्र सिंह सिकरवार पर आॅनलाइन बैठक कराई तो सामाजिक समरसता के लिए सब एकजुटता से सामने आए। इस तरह संघ के मूल विचार मंदिर कुए श्मशान सबके लिए खुले हों पूरे ग्वालियर का विचार बन गया। विभाग संघ चालक विजय गुप्ता कहते हैं कि हिन्दू समाज हर संकट में एक दूसरे के साथ है और श्मशानों के दरवाजे खोलने से इसका प्रकटीकरण हुआ है। सामाजिक समरसता के लिए श्मशानों के लिए आगे आगे व्यापक संवाद करके एक आदर्श व्यवस्था हम समाज के सामने जल्द प्रस्तुत करेंगे।

यह कहा प्रभारी मंत्री तोमर ने

संघ ने समाज को सदैव एकजुट किया है और सामाजिक समरसता को समृद्ध किया है। कोरोना महामारी के दौर में संघ के आहवान पर सभी समाजों ने अपने पराये का भेद छोड़कर बता दिया है कि हमारी संस्कृति हमें क्या सिखलाती है। मैं इस प्रयास और निर्णय का स्वागत करते हुए इस दिशा में हर तरह के सहयोग को तत्पर हूं। श्मशानों में व्यवस्था के लिए जो जरुरी होगा मुझे बताएं।

यह  बोले सांसद विवेक शेजवलकर

शाद ही सामाजिक समरसता का संदेश देता आया है। कुए और श्मशान सबके लिए एक ही होना चाहिए और आज संकटकाल में इस विचार को ग्वालियर ने अपनाकर सामाजिक समरसता का आदर्श प्रस्तुत किया है। इस दिशा में संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणा और उसे सहर्ष अपनाने वाले हमारे आपके बीच के बंधु अभिनंदन के हकदार हैं। मैं इस प्रयास में हर आवश्यक सहयोग के लिए प्रयास करुंगा। ऐसे अनुकरणीय उदाहरण हमें संकटकाल में एकजुट कर रहे हैं।

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