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आ गई हरियाली अमावस्या,पितरों का स्मरण कर उनकी स्मृति में वृक्षारोपण का है विशेष महत्व

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त 2026, बुधवार को रात 11 बजकर 7 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी. सावन में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. इस समय बारिश के कारण चारों ओर हरियाली छाने लगती है. यही वजह है कि इस अमावस्या का संबंध प्रकृति और हरियाली से भी जोड़ा जाता है.

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. वहीं सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. ऐसे में सावन की अमावस्या पर शिव पूजा के साथ पितरों का स्मरण करने के साथ ही उनकी स्मृति  में वृक्षारोपण की परंपरा है.

हरियाली अमावस्या का एक खास संदेश प्रकृति संरक्षण से भी जुड़ा है. इस दिन पौधे लगाने और पेड़-पौधों की देखभाल करने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पेड़-पौधों में देवताओं का वास माना गया है, इसलिए उनकी सेवा करना पुण्यकारी माना जाता है.

भगवान शिव की पूजा का है विशेष महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे खास माना जाता है. ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करके भगवान शिव की पूजा की जा सकती है. सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर दीपक जलाएं. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करें. बेलपत्र, फूल और धतूरा आदि पूजा सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.

पितरों के लिए भी खास है यह दिन

अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण और उनके लिए दान-पुण्य करने की परंपरा है. हरियाली अमावस्या के दिन भी लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपडे़ या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है.

हरियाली अमावस्या पर क्या करें?

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करें. शिवलिंग पर जल अर्पित करें और ओम नमः शिवाय का जाप करें. इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें. अगर संभव हो तो किसी पौधे का रोपण करें और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लें. जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है.

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