प्रवीण दुबे
शक्कर अर्थात चीनी के बढ़ते दामों ने देशवासियो की परेशानी बढ़ा दी है उधर चीनी बनाने में इस्तेमाल होने वाले गन्ने से इथेनोल बनाने के काम को बढ़ावा देने की सरकारी नीति ने अब गाड़ियों के कम एवरेज के बाद चीनी के बढ़ते दामों के द्वारा आम आदमी को हाईपर टेंशन में ला दिया है।
हालात इस कदर बिगड़ते देख केन्द्र सरकार भी सकते में आ गई है इसको लेकर सूत्रों से जो खबरें बाहर आ रही हैं उसके मुताबिक लगातार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात, थोक कारोबारियों के स्टॉक पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार करीब 10 लाख टन तक चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने और बंदरगाहों पर मौजूद रिफाइंड चीनी को घरेलू बाजार में जारी करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब एक महीने में कई बाजारों में चीनी के खुदरा भाव में लगभग 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं थोक और मिल स्तर पर भी कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच गई हैं।
सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के Price Monitoring System के अनुसार 14 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 54 रुपये प्रति किलो था, जबकि अखिल भारतीय औसत थोक भाव करीब 4,732 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। देशभर के 555 बाजार केंद्रों से 22 जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम की निगरानी की जाती है।
कई प्रमुख बाजारों में 5,000 रुपये क्विंटल के पार भाव
चीनी के थोक बाजार में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रमुख बाजारों में भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच चुके हैं।
18 अगस्त को उत्तर प्रदेश में M-grade चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव करीब 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं महाराष्ट्र के कोल्हापुर जैसे प्रमुख बाजारों में थोक कीमत करीब 5,350 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की खबर है।
मुंबई में खुदरा चीनी का भाव बुधवार को करीब 58 रुपये किलो तक पहुंच गया, जबकि कुछ बाजारों में इसके 61 रुपये किलो तक जाने की आशंका जताई गई है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव
चीनी की कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग में सामान्य तौर पर तेजी आती है। ऐसे में कारोबारियों को आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।
गन्ने का एथेनॉल में इस्तेमाल भी बना कारण
चीनी की उपलब्धता पर दबाव के पीछे गन्ने के एक हिस्से का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल भी एक कारण माना जा रहा है। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के चलते गन्ने के उपयोग को लेकर चीनी और एथेनॉल के बीच संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
सरकार के सामने आयात का विकल्प
लगातार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात, थोक कारोबारियों के स्टॉक पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।
रॉयटर्स के अनुसार सरकार करीब 10 लाख टन तक चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने और बंदरगाहों पर मौजूद रिफाइंड चीनी को घरेलू बाजार में जारी करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
आम आदमी की जेब पर पड़ रहा सीधा असर
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ घरों के मासिक बजट तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, चाय, बिस्किट, बेकरी उत्पाद, शीतल पेय और अन्य तैयार खाद्य पदार्थों की लागत भी बढ़ सकती है। खाद्य कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक इनपुट और पैकेजिंग लागत बढ़ने से मिठाई और स्नैक्स जैसे तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।
ऐसे में त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमत आम उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं कि आयात शुल्क में राहत और आपूर्ति बढ़ाने जैसे उपायों से बाजार में बढ़ती कीमतों पर कितना नियंत्रण पाया जा सकता है।