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राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 19वे स्थापना दिवस समारोह का रंगारंग आयोजन

ग्वालियर 19 अगस्त 2026/ ग्वालियर संगीत व शौर्य की धरा है। ग्वालियर में शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा रही है। संगीत का आधार भक्ति है। भक्ति के बिना शास्त्रीय संगीत अधूरा होता है। शास्त्रीय संगीत संप्रदायों से भी ऊपर है। इस आशय के विचार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने व्यक्त किए। श्री पवैया, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 19वे स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

बुधवार 19 अगस्त को संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित हुए स्थापना दिवस समारोह के उदघाटन अवसर पर  राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में लगाई गई कला प्रदर्शनी की सराहना भी की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि भले ही आज मोबाइल फोन का युग है, लेकिन संगीत का युग हमेशा रहेगा। हर समस्या का समाधान संगीत में छिपा है। व्यक्ति कितना भी तनाव में क्यों न हो, संगीत की मधुर धुन उसे मानसिक शांति प्रदान करती है।
विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
आरंभ में  अतिथियों ने ललित कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में चित्रों के माध्यम से देश की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया। अतिथियों ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का उदघाटन भी किया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री श्री ध्यानेन्द्र सिंह, विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य श्री चंद्रप्रताप सिंह सिकरवार, अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. कुमार रत्नम, विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. आशुतोष खरे, श्री कनवर मंगलानी, श्री धीरेन्द्र चंदेल, विद्या परिषद सदस्य श्री अशोक आनंद, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. पारुल दीक्षित, डॉ. अंजना झा, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. संजय सिंह व डॉ. गौरी प्रिया सहित विश्वविद्यालय के गुरुजन, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में कला रसिक उपस्थित रहे।

सुर, लय और अभिनय की त्रिवेणी में सजी महाराजा मानसिंह तोमर की अमर गाथा

अभिनय, गायन और भरतनाट्यम के अद्भुत संगम ने मंच पर इतिहास को सजीव कर दिया। स्थापना दिवस समारोह की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति महाराजा मानसिंह तोमर के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन रही, जिसने दर्शकों को कला, संस्कृति और इतिहास के ऐसे लोक में पहुँचा दिया, जहाँ शौर्य और सौंदर्य एक साथ साकार होते दिखाई दिए।
कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे की संकल्पना पर तैयार इस भव्य नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन थियेटर विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. पारुल दीक्षित और भरतनाट्यम विभागाध्यक्ष डॉ. गौरीप्रिया ने किया। लगभग 50 कलाकारों ने 50 मिनट की प्रस्तुति में महाराजा मानसिंह तोमर के जन्म से लेकर उनके जीवन के विभिन्न आयामों को मंच पर जीवंत कर दिया।
इस प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता अभिनय, गायन और भरतनाट्यम का अनूठा समन्वय रहा। कहीं वीरता की हुंकार सुनाई दी तो कहीं संगीत की मधुर स्वर-लहरियों ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। नृत्य की सधी हुई मुद्राओं और अभिव्यंजक अभिनय ने राजा मानसिंह तोमर की गौरवगाथा को साकार कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो इतिहास स्वयं मंच पर उतर आया हो और कला रसिक उसके साक्षी बन गए हों।
प्रस्तुति का समापन कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे द्वारा रचित स्तुति गान “इस कला मंदिर को करें हम नमन…” से हुआ, जिसने पूरे सभागार को श्रद्धा और समर्पण के भाव से भर दिया।

रामभक्ति से सावन के श्रृंगार तक कथक के रंगों ने बाँधा समाँ

समारोह में कथक विभाग की प्रस्तुतियाँ भी आकर्षण का केन्द्र रहीं। विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना झा के निर्देशन में विद्यार्थियों ने “रामाष्टकम्”, “तराना” और “बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया” के माध्यम से कथक के विविध रंगों को मंच पर उकेरा।
“रामाष्टकम्” में भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति, मर्यादा और आध्यात्मिक चेतना के भावों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं “तराना” में कथक की लय, गति और ऊर्जा ने कला की सजीव अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि विभाग के वर्तमान और भूतपूर्व विद्यार्थियों ने एक साथ मंच साझा कर परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
“बरखा ऋतु आई, आई साँवरिया” में सावन की रिमझिम फुहार, प्रकृति का उल्लास और प्रियतम के मिलन की प्रतीक्षा को कथक की मनोहारी भाव-भंगिमाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। नृत्य की प्रत्येक मुद्रा मानो मेघों की गूँज और पायल की रुनझुन के साथ संवाद करती दिखाई दी।

राग मियाँ मल्हार के सुरों में बरसी पावस की मधुर फुहार

कार्यक्रम में वाद्यवृंद की प्रस्तुति “पावस ऋतु” ने भी संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वर वाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम रस्तोगी की रचना पर 20 कलाकारों ने स्वर और अवनद्ध वाद्यों का सामूहिक समन्वय प्रस्तुत किया।
महाराजा मानसिंह तोमर को समर्पित इस संगीतमय प्रस्तुति में राग मियाँ मल्हार को आधार बनाकर तीनताल में वर्षा ऋतु का मनोहारी संगीतात्मक चित्रण किया गया। सुरों की तरंगों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि मानो मंच पर सावन स्वयं उतर आया हो। कहीं मेघों की गड़गड़ाहट का आभास हुआ तो कहीं बूंदों की मधुर टपकन ने प्रकृति के उल्लास को जीवंत कर दिया।

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