भाजपा के फायर ब्रांड नेता और मुरैना सांसद अनूप मिश्रा ने पिछले चार पांच दिनों में जो सक्रीयता दिखाई है और अंचल ही नहीं देश के प्रमुख कांग्रेसी चेहरे के रूप में अपनी जगह बना चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया को उन्हीं के गृहनगर में उनके खिलाफ सफल व प्रभावी आंदोलन करके लोकसभा चुनाव से पहले ग्वालियर में भाजपा के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। अनूप द्वारा छेड़ा गया आंदोलन इस कदर सफल रहा है कि वे हीरो के र्रूप में उभरकर सामने आए है।
अब जबकी लोकसभा चुनाव बिलकुल नजदीक हैं मध्यप्रदेश में भाजपा की राजनीति का केन्द्र माने जाने वाले ग्वालियर में राजनीति सरगर्म है। यूं तो वर्तमान में यहां से वजनदार केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह सांसद हैं और जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं भाजपा को फिलहाल दूसरा कोई चेहरा नजर नहीं आ रहा है।
इस बात को नरेन्द्र सिंह भी भली प्रकार जानते हैं शायद यही वजह है कि पिछले कई दिन से श्री तोमर ने ग्वालियर में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। लेकिन राजनीतिक पंडितों की मानी जाय तो विधानसभा चुनाव में ग्वालियर की छह विधानसभाओं मैं जो परिणाम सामने आए हैं उसके बाद से नरेन्द्रसिंह की चुनावी राह इतनी आसान नही कही जा सकती ।
शायद यही कारण रहा कि विधानसभा चुनाव के बाद ऐसे संकेत मिले थे कि श्री तोमर अपने लिए ग्वालियर के अतिरिक्त प्रदेश के कुछ सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र की तलाश कर रहे हैं यह बात अलग है कि पार्टी ने फिलहाल उन्हें अपने ही लोकसभा छेत्र से सक्रीय रहने को कहा है।
श्री तोमर और खासकर संगठन द्वारा ग्वालियर लोकसभा सीट के लिए प्रभारी बनाये गए अभय चौधरी जो की श्री तोमर के ही बेहद नजदीक हैं यह बात भली प्रकार महसूस कर रहे थे कि ग्वालियर में कार्यकर्ताओं के बीच लोकसभा चुनाव जैसी सक्रीयता देखने को नहीं मिल रही। और यह संकेत उनके लिए ठीक नहीं है।
इसी बीच कांग्रेस द्वारा चुनाव में श्रेय लूटने के लिए पूर्व में भाजपा के कार्यो को अपने नाम करने की राजनीति सामने आई। इसको बड़ी चतुराई से नरेन्द्र तोमर और अभय चौधरी ने आंदोलन का रूप देकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना बनाई।
इसमें श्री तोमर ने खुदको पीछे रखकर महापौर विवेक शेजवलकर को आगे किया और उन्हीं के माध्यम से मुरैना सांसद अनूप मिश्रा को यह कहकर जोड़ने को कहा कि जिस अस्पताल का पुनः शिलान्यास करके कांग्रेस ज्योतिरादित्य को श्रेय दिलाना चाहती है वह योजना आपके स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल की है।
यहां तक तो सब ठीक था लेकिन यह बात जैसे ही सामने आई और विवेक शेजवलकर के साथ अनूप मिश्रा की पत्रकारवार्ता हुई। अनूप मिश्रा ने जैसे पूरे कार्यक्रम को हाइजेक कर लिया।
हालात यहां तक जा पहुंचे की नरेंद्र तोमर और अभय चौधरी की योजनानुसार यह कार्यक्रम जिले का तो बन गया लेकिन अनूप मिश्रा इसमें सबको पीछे छोड़कर आगे निकल गए,आंदोलन वाले दिन तो हालात यहां तक जा पहुंचे कि विवेक शेजवलकर खुद नरेंद्र तोमर और यहां तक कि जिले के अध्यक्ष और पार्टी के एकमात्र विधायक व कई अन्य बड़े नेताओं ने इस आंदोलन से दूरी बना ली।
यह बात अनूप मिश्रा भी भली भांति समझ गए थे यही कारण रहा कि श्री मिश्रा ने आंदोलन को सफल बनाने व्यक्तिगत रूप से अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अपने प्रभाव वाले भितरवार सहित ग्वालियर के ही अपने खास कार्यकर्ताओं नेताओं को आंदोलन में लगाया। इतना ही नहीं आंदोलन में शुरु से लेकर आखिर तक डटे भी रहे। लम्बे समय बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश दिखाई दिया और पुलिस प्रशासन को लाठियां वाटर केनन व अश्रुगैस चलाकर गिरफ्तारी करना पड़ी। इस पूरे आंदोलन दबे छुपे अनूप मिश्रा का ग्राफ एकदम ऊपर ला दिया है और वह लोकसभा चुनाव से पहले हीरो बनकर उभरे हैं।
श्री मिश्रा की इस लोकप्रियता ने अब ग्वालियर में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। इसके संकेत इस बात से भी लगाए जा सकते हैं कि आंदोलन की सफलता की धमक प्रदेश भाजपा तक इतनी प्रभावी रही कि शाम होते होते भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता करके पार्टी के आंदोलन के साथ खड़े होने की बात कही। दूसरी ओर आज अनूप द्वारा आयोजित किए मौन धरने में तमाम वे नेता दिखाई दिए जो पिछले कई दिनों से पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे मतलब साफ है अनूप तमाम असन्तुष्ट नेताओं में यह बात पहुंचाने में कामयाब रहे की यह आंदोलन लीक से हटकर था। देखना दिलचस्प होगा की पार्टी हाईकमान इसे किस नजरिए से लेता है। इस घटनाक्रम ने कई नेताओं की धड़कनें तेज कर दी हैं।