ग्वालियर 4 नवंबर 2025/कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह दिन पवित्र गंगा स्नान और धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से सभी पाप धूल जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए वारणासी,हरिद्वार,प्रयागराज आदि देश के सभी गंगा तटों पर स्नान के लिए भक्त पहुंच रहे हैं
कार्तिक पूर्णिमा इस बार 5 नवंबर को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, माता तुलसी और भगवान शिव की उपासना करना सबसे शुभ माना जाता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और ऐसा करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
इस दिन श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और भगवान की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया दान-पुण्य कई गुना फल देता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था. तो चलिए जानते हैं कि 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर कितने से कितने बजे तक स्नान दान का मुहूर्त रहेगा.
कार्तिक पूर्णिमा 2025 स्नान-दान मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 4 नवंबर को रात 10 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 5 नवंबर को शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा.
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और दान का महत्व
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है. इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना मोक्षदायक बताया गया है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र बना देता है. यह स्नान जन्मों के पापों को धो देता है और व्यक्ति को पुण्य का लाभ प्रदान करता है.
दान का भी इस दिन विशेष महत्व है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, दीपक, कंबल या धन का दान करने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है. यह दान न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि पितरों की आत्मा को भी शांति प्रदान करता है. इसलिए इस दिन स्नान और दान को धर्म, करुणा और मानवता की सच्ची साधना माना जाता है.
कार्तिक पूर्णिमा 2025 का स्नान-दान मुहूर्त
इस साल कार्तिक पूर्णिमा 2025 पर गंगा स्नान करने और दान-पुण्य करने के लिए शुभ मुहूर्त बुधवार को भोर में 4 बजकर 52 मिनट से लेकर 5 बजकर 44 मिनट तक बताया गया है। इस शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान के बाद जरूरतमंद को दान देने की परंपरा रही है। स्नान-दान के बाद पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7.58 बजे से सुबह 9.20 बजे तक अभिष्ट रहेगा। शाम को पूजा का मुहूर्त प्रदोष काल में 5.15 बजे से शाम 7:05 बजे तक बताया गया है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 पर करें गंगाजल का आचमन
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपों का दान करना भी बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। स्नान-दान के बाद घर में चहुंओर गंगाजल का छिड़काव करने से दुख-दरिद्र दूर होता है। व्याधि का समूल नाश होता है। कार्तिक पूर्णिमा पर उपवास-व्रत रखने की भी परंपरा है। इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के समय ही व्रत का संकल्प लिया जाता है। अपने आराध्य देव की स्तुति कर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की पूजा करने के बाद भगवान विष्णु-लक्ष्मी की विधि-विधान से कथा सुनने की परंपरा है। श्री सत्यनारायण स्वमी की कथा पाठ का श्रवण करना भी विशिष्ट फलदायी माना जाता है। दिवाली की तरह ही घर के सभी मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के साथ ही एक दीपक तुलसी जी के पास, एक दीपक उत्तर दिशा में, एक दीपक पूजा घर में और एक दीपक जल स्रोत के पास जलाया जाता है।