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धर्मान्तरण का अड्डा बना ग्वालियर,सनसनी खेज मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर ने जांच की बात कह पल्ला झाड़ा

प्रवीण दुबे
ग्वालियर 5 नवंबर 2025/ग्वालियर के बड़ागांव क्षेत्र स्थित बिशप निवास में चल रहे धर्मातरण और 5 राज्यों के बच्चों को धर्मगुरु बनाने की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर ग्वालियर जिला प्रशासन का नाकारापन सामने आ गया है। इसके बाद भितरवार धर्मान्तरण और बांग्लादेशी घुसपैठिये मामले की तर्ज पर सीधे कार्यवाही की जगह ग्वालियर प्रशासन ने दो सदस्यो की जांच दल गठित करने की बात कहकर फिलहाल पल्ला झाड़ दिया है।
धर्मान्तरण से जुड़े इस सनसनी खेज मामले उजागर होने के बाद ग्वालियर एकबार फिर सुर्खियों में है तमाम सनातनी संगठन इस खबर के सामने आने के बाद गुस्से में हैं। यहां बताना उपयुक्त होगा कि अभी कुछ माह पूर्व ही ग्वालियर के भितरवार में खुलेआम धर्मान्तरण और सनातन के खिलाफ मंच से अपशब्द बोलने का मामला सामने आया था सबकुछ खुलेआम होने के बावजूद आज तक इसको लेकर कोई कार्यवाही जिला प्रशासन ने नहीं की,इतना ही नहीं डबरा में भी ईसाई मिशनरीज से जुड़े स्कूल की करतूतें सामने आ चुकी हैं।
बंग्लादेशी घुसपैठियों के पकड़े जाने और पुलिस को चकमा देकर भागने की घटनायें भी ग्वालियर में घटित हुई हैं। इन सबको लेकर तमाम संगठन कार्यवाही की मांग करते रहे हैं लेकिन ग्वालियर प्रशासन के कानों पर जूँ नहीं रेंगी।
अब देश के एक बड़े अखबार द्वारा ग्वालियर के बड़ेगांव में चोरी छिपे आदिवासी-गरीब बच्चों का कैंप लगाकर धर्मांतरण ? और 5 राज्यों के बच्चों को धर्मगुरु बनने की ट्रेनिंग देने का खुलासा किए जाने के बाद माहौल गरमा गया है
इस खुलासे  में सामने आया है कि
ग्वालियर के बड़ागांव क्षेत्र स्थित बिशप निवास परिसर के एक सेंटर में 26 बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही है, ये बच्चे मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों के अलावा ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल से लाए गए बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह सेंटर ईसाई मिशनरी संगठन द्वारा संचालित है और बच्चों को धार्मिक अध्ययन के साथ आध्यात्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया गया है कि उन्हें आगे चलकर धर्मोपदेशक (रिलीजियश इंस्ट्रक्टर्स) के रूप में तैयार करने की योजना है। सेंटर शहर से लगभग 8 किमी दूर है। धार्मिक अनुष्ठान और संस्कार शहर की मुख्य चर्चों के बजाय ग्रामीण इलाकों की चर्चा में आयोजित किए जा रहे हैं।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि संगठन का विशेष ध्यान आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों पर है। परिवारों को बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का आश्वासन देकर उन्हें इस कार्यक्रम में जोड़ा जा रहा है। एडीएम सी. बी. प्रसाद बोले-‘बिना पूर्व सूचना के धर्म परिवर्तन कराना जबरिया धर्म परिवर्तन की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में राज्य धर्मांतरण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।’ महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों ने खुद स्वीकारा है कि वे फादर बनने की पढ़ाई कर रहे
इस जानकारी में यह भी बताया गया है कि बिशप निवास में बच्चों का ट्रेनिंग सेंटर है। बिशप के नेतृत्व में ही उनकी देखभाल व धार्मिक शिक्षा दी जाती है। हाल ही में डबरा स्थित चर्च में एक बच्चे का डीकन (धर्मगुरू) बनाने का धार्मिक संस्कार किया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि बिशप हाउस के पेड़ों से घिरी इमारत में बच्चों को छिपाकर रखा जाता है। वे केवल जरूरी होने पर बाहर निकलते हैं।
शब्दशक्ति न्यूज़ से बोलीं ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान हमसे नहीं ली बिशप ने अनुमति,  जांच समिति बना दी है करेंगे कार्यवाही
इस सनसनी खेज मामले के सामने आने के बाद शब्दशक्ति न्यूज़ ने ग्वालियर जिला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान से चर्चा की और उनसे सवाल किया कि धर्मांतरण और अन्य प्रदेशों ke आदिवासी बच्चों के साथ बिशप निवास में संदिग्ध धार्मिक गतिविधियों का मामला सामने आने के बाद ग्वालियर प्रशासन ने क्या कार्यवाही की है ? इस सवाल के जवाब में रुचिका चौहान ने कहा कि उन्होंने मामले की जांच के लिए एडीएम,एसडीएम के नेतृत्व में जांच समिति गठित करके जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी मीडिया आधारित है जांच में सच्चाई सामने आने के बाद तुरंत उचित कार्यवाही की जाएगी। यह पूछे जाने पर क्या ग्वालियर प्रशासन के पास इस तरह की किसी भी धार्मिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति सम्बन्धित कोई आवेदन बड़ागांव से आया है इसके जवाब में कलेक्टर रुचिका चौहान ने साफ इंकार किया कि उनके पास ऐसा कोई आवेदन नहीं आया।
सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल तक की जेल
मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 अधिनियम के अनुसार धर्मांतारण के सामान्य मामलों में 1-5 साल जेल। महिलाओं, नाबालिगों या एससी-एसटी के मामले में 2-10 साल जेल और 50,000 जुर्माना। सामूहिक धर्मांतरण पर 5-10 साल जेल और 1 लाख रुपए जुर्माना।
धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य है।
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