नई दिल्ली/ कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के तीन दिवसीय 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने आशा जताई कि यह कार्यक्रम केवीके के माध्यम से किसानों के ज्ञानवर्धन में उपयोगी साबित होगा। ‘प्रौद्योगिकी आधारित खेती हेतु युवाओं का सशक्तिकरण’ विषयक यह सम्मेलन समय की आवश्यकता के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि कृषि, युवा और तकनीक का संगम होना चाहिए। देश के गरीब किसानों को भी कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान का लाभ मिलना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने देश के जीडीपी में कृषि क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने पर भी जोर दिया।
शुभारंभ समारोह में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा देश के केवीके के वैज्ञानिक एवं अन्य प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम में श्री तोमर ने कहा कि हमारे संस्कारों में विरासत का बड़ा महत्व है। विरासत आर्थिक हो, सामाजिक हो, सांस्कृतिक हो या पारिवारिक हो, विरासत के प्रति मोह, सम्मान, उसे अक्षुण्ण बनाए रखना और आगे बढ़ाना इन सभी भावों से हम सभी ओत-प्रोत रहते हैं। वर्तमान समय में कृषि की विरासत आने वाली पीढ़ी को सौंपना कठिन दिखाई दे रहा है, ऐसे में इस कार्यक्रम के माध्यम से कृषि, युवा और तकनीक का जुड़ाव कैसे हो, इस पर विचार होना चाहिए। कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा पहलू है लेकिन इसके बावजूद कृषि के प्रति जितना आकर्षण निरंतर बढ़ता रहना चाहिए, उतना दिखाई नहीं देता है। इसके निराकरण हेतु चिन्तन-मनन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से आज तक कृषि के क्षेत्र में जो प्रगति हुई, उसमें किसानों का परिश्रम एक पक्ष है लेकिन कृषि शिक्षा, कृषि वैज्ञानिक, उनका अनुसंधान और सरकारों की किसान हितैषी योजनाओं का भी बड़ा योगदान है। जब हम कृषि के क्षेत्र में वैज्ञानिकों के योगदान की बात करते हैं तो निश्चित रूप से केवीके, कृषि विश्वविद्यालयों का योगदान भी सामने आता है। आज देश खाद्यान्न, बागवानी और दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है तो इसमें भी इन वैज्ञानिकों का योगदान प्रशंसनीय है। जिलों में कृषि संबंधी मार्गदर्शन के लिए सक्षम इकाई कृषि विज्ञान केंद्र है। यह इकाई कृषि की धुरी है, इसलिए इन केन्द्रों की जिम्मेदारी सरकार के लक्ष्य पूरा करने, आमजन की आवश्यकता पूर्ण करने और कृषि को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने की है। केवीके का प्रत्येक व्यक्ति देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने वाला है।
श्री तोमर ने अधिक से अधिक किसानों तक केवीके की पहुंच बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि क्षेत्र में मैपिंग करके किसानों को केवीके से जोड़ने हेतु रोड मैप तैयार किया जाना चाहिए। केवीके सभी किसानों का प्रतिनिधि हैं। ये केंद्र कृषि संबंधी समस्याओं के निराकरण के केंद्र बने, गरीब किसानों का सहारा बने यह आवश्यक है। केवीके के साथ 171 मोबाइल एप व 3 लाख सीएससी कार्यरत है, इनके लाभ किसानों के खेतों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री जी का आव्हान, किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य, सही मायने में तब पूरा होगा जब देश का एक-एक किसान केवीके की सलाह और सरकार की योजनाओं दोनों की भरपूर मदद लेने हेतु संकल्प लेगा।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पिछले वर्षों में 13 हजार करोड़ रूपए किसानों का प्रीमियम जमा हुआ और उन्हें 58 हजार करोड़ रू. मुआवजे का भुगतान हुआ। वहीं, योजना को अब सरकार ने स्वैच्छिक कर दिया है। श्री तोमर ने बताया कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने हेतु ई-नाम योजना चलाई गई है। इसके तहत 585 थोक मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है, जबकि 415 अन्य मंडियों को अतिशीघ्र इससे जोड़ दिया जाएगा। इसके माध्यम से 91 हजार करोड़ रू. से ज्यादा का लेन-देन किया गया है। किसान अपने उत्पाद की लागत घटा सके, पैकेजिंग व ब्रांडिंग कर अपने उत्पाद को देश के बाजार में कहीं भी बेच सकें, इसके लिए एफपीओ की भूमिका महसूस की गई, इसके मद्देनजर सरकार ने हाल ही में 6,865 करोड़ रू. के कुल बजटीय प्रावधान के साथ 10 हजार नए एफपीओ बनाने की घोषणा की है। इन एफपीओ में किसानों को जोड़ने की जिम्मेदारी भी केवीके की रहेगी।
श्री तोमर ने बताया कि जैविक खेती वर्तमान में ज्वलंत विषय है, इसके मद्देनजर आदिवासी इलाकों की मैपिंग करके वहां जैविक खेती को प्रोत्साहित करना जरूरी है। इससे देश के जैविक रकबे में वृद्धि होगी, साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। देश के जीडीपी में फसलों का योगदान कम होने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जीडीपी में बागवानी, मत्स्य पालन और पशुपालन की तुलना में कृषि का योगदान कम है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर केवीके के कुछ नए उत्पादों की लांचिंग के साथ ही पुस्तकों का विमोचन भी केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने किया।